प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (तस्वीर क्रेडिट@BRICS_live)

भारत की आर्थिक प्रगति की ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत ने की सराहना,सुधारों और तेज विकास दर को बताया वैश्विक निवेश का आधार

मेलबर्न,9 जुलाई (युआईटीवी)- भारत की अर्थव्यवस्था और विकास की रफ्तार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के कई प्रमुख उद्योग जगत के नेताओं ने भारत की आर्थिक प्रगति,सुधारों और निवेश के अनुकूल माहौल की खुलकर सराहना की है। उनका कहना है कि व्यापक आर्थिक सुधारों,मजबूत नीतियों और दीर्घकालिक विकास दृष्टि के कारण भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान भारत ने लगभग आठ प्रतिशत की औसत विकास दर हासिल की है,जो जी-20 देशों में सबसे अधिक मानी जा रही है और यही कारण है कि दुनिया का ध्यान तेजी से भारत की ओर आकर्षित हो रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख बैंकिंग समूह एएनजेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नुनो माटोस ने भारत की आर्थिक मजबूती की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भारत एक बेहद मजबूत और आत्मविश्वास से भरा हुआ देश बन चुका है। उनके अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण आर्थिक और संरचनात्मक सुधार लागू किए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत केवल पारंपरिक क्षेत्रों पर निर्भर नहीं है,बल्कि वह नई तकनीकों और भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप अपने औद्योगिक ढाँचे को तेजी से बदल रहा है।

नुनो माटोस ने कहा कि भारत विशेष रूप से प्रौद्योगिकी,नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे उभरते क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में हो रहे निवेश और नवाचार भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे और भारत ने समय रहते इन क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। उनके अनुसार यही वजह है कि दुनिया भर के निवेशकों और वैश्विक कंपनियों की नजर अब भारत पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत का आर्थिक परिवर्तन केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है,बल्कि यह आने वाले दशकों की विकास यात्रा की मजबूत नींव भी तैयार कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले पाँच वर्षों में भारत की आर्थिक विकास दर लगभग आठ प्रतिशत के आसपास रही है,जो जी-20 देशों में सबसे अधिक है। उनके अनुसार यह केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं,बल्कि भारत की मजबूत आर्थिक नीतियों,निवेश-अनुकूल वातावरण और व्यापक सुधारों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस वास्तविकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और अब भारत दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में अपनी जगह बना रहा है। उनका मानना है कि भारत की आर्थिक क्षमता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी तथा वह वैश्विक विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े सेवानिवृत्ति निवेश कोषों में से एक ऑस्ट्रेलियनसुपर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पॉल श्रोडर ने भी भारत की आर्थिक नीतियों और निवेश के माहौल की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घकालिक सोच और व्यापार तथा निवेश के प्रति उनकी स्पष्ट समझ ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। उनके अनुसार किसी भी देश में निवेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व नीति की स्थिरता और भविष्य की स्पष्ट दिशा होती है और भारत ने इन दोनों मोर्चों पर सकारात्मक संकेत दिए हैं।

पॉल श्रोडर ने बताया कि उन्हें पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि उन बैठकों के दौरान प्रधानमंत्री ने हमेशा यह विश्वास दिलाया कि भारत व्यापार,निवेश और आर्थिक विकास को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सोच केवल अल्पकालिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है,बल्कि वह भारत की दीर्घकालिक समृद्धि और सतत आर्थिक विकास पर केंद्रित है। उनके अनुसार निवेशकों को यह भरोसा मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है कि सरकार स्थिर नीतियाँ अपनाएगी और भविष्य में भी आर्थिक सुधारों की दिशा जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि भारत ने जिस प्रकार आधारभूत ढाँचे,डिजिटल अर्थव्यवस्था,विनिर्माण और वित्तीय क्षेत्र में सुधार किए हैं,उससे विदेशी निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ा है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशक भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं,बल्कि दीर्घकालिक निवेश के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में विदेशी निवेश और आर्थिक गतिविधियों में और अधिक तेजी देखने को मिलेगी।

इस दौरान वैश्विक डिजाइन और वास्तुकला क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ तथा पॉपुलस के वरिष्ठ प्रिंसिपल,वैश्विक निदेशक और सह-संस्थापक पॉल हेनरी ने भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बढ़ते संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का स्पष्ट संकेत है। उनके अनुसार दोनों देशों के संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेल,आधारभूत ढाँचे,निवेश और भविष्य की विकास परियोजनाओं तक भी विस्तार पा रहे हैं।

पॉल हेनरी ने कहा कि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक साझेदारियों को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच सहयोग का यह नया दौर दोनों देशों के लिए लाभदायक साबित होगा और इससे आर्थिक तथा रणनीतिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 2036 के संभावित ओलंपिक खेलों और वर्ष 2030 के संभावित राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन को लेकर अहमदाबाद को मिले समर्थन का उल्लेख किया। उनके अनुसार इन बड़े खेल आयोजनों के लिए भारत की तैयारियाँ और सरकार की प्रतिबद्धता देश की भविष्य उन्मुख सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएँ केवल खेलों तक सीमित नहीं रहतीं,बल्कि इनके माध्यम से आधारभूत ढाँचे का विस्तार,रोजगार के अवसर,पर्यटन और निवेश में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

पॉल हेनरी का मानना है कि भारत इस समय जिस गति से अपने शहरों,परिवहन व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास कर रहा है,उससे आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक क्षमता और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि भारत में दीर्घकालिक योजनाओं को जिस प्रकार आगे बढ़ाया जा रहा है,उससे स्पष्ट है कि देश केवल वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर रहा,बल्कि भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को भी ध्यान में रखकर काम कर रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत के इन वरिष्ठ प्रतिनिधियों की टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है। डिजिटल परिवर्तन,हरित ऊर्जा,इलेक्ट्रिक वाहन,विनिर्माण,आधारभूत ढाँचे के विस्तार और निवेश-अनुकूल नीतियों के कारण भारत अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति और सुधारों का सिलसिला आगे भी जारी रहता है,तो भारत आने वाले वर्षों में विश्व अर्थव्यवस्था के सबसे प्रभावशाली देशों में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत कर सकता है। ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत के नेताओं की सकारात्मक टिप्पणियां इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक निवेश समुदाय भारत की विकास यात्रा पर भरोसा जता रहा है और उसे भविष्य की आर्थिक शक्ति के रूप में देख रहा है।