प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (तस्वीर क्रेडिट@BRICS_live)

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने एंथनी अल्बनीज से की मुलाकात,भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने पर जोर

मेलबर्न,9 जुलाई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच आर्थिक,व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा की। यह मुलाकात भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम के अवसर पर हुई, जहाँ दोनों नेताओं ने उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों की मौजूदगी में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक की शुरुआत गर्मजोशी भरे स्वागत के साथ हुई,जिसमें प्रधानमंत्री अल्बनीज ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और दोनों नेताओं ने एक साथ तस्वीर भी खिंचवाई। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख उद्योगपतियों तथा कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए निवेश, नवाचार,व्यापार और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों के लिहाज से सीईओ फोरम को एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। यह फोरम दोनों देशों की सरकारों और उद्योग जगत के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करता है तथा आर्थिक विकास और निवेश से जुड़े मुद्दों पर सुझाव भी देता है। इसका उद्देश्य केवल व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देना ही नहीं,बल्कि ऐसी दीर्घकालिक रणनीतियां तैयार करना भी है,जिनसे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को समान रूप से लाभ मिल सके। यही कारण है कि इस मंच पर दोनों देशों के शीर्ष उद्योगपति,निवेशक और नीति निर्माता नियमित रूप से एकत्रित होकर भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करते हैं।

सीईओ फोरम वर्ष 2012 से सक्रिय है और भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इस मंच को नई ऊर्जा के साथ फिर से शुरू किया था। तब से दोनों देशों ने इसे व्यापार,निवेश,तकनीक,ऊर्जा, शिक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने का प्रयास किया है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार की बैठक के बाद दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार के नए अवसरों को गति मिलेगी और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था,निवेश-अनुकूल वातावरण और व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सरकार लगातार ऐसे सुधार कर रही है,जिनसे व्यापार करना अधिक आसान और पारदर्शी हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भविष्य की वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

इस दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करने की भी तैयारी की। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा करना है। दोनों देशों के बीच रक्षा,समुद्री सुरक्षा,ऊर्जा,शिक्षा,प्रौद्योगिकी,महत्वपूर्ण खनिज,स्वच्छ ऊर्जा,कृषि और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी और कई नए सहयोगी कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा केवल सरकारी बैठकों तक सीमित नहीं है। अपने कार्यक्रम के तहत वह ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात को दोनों देशों के मजबूत कूटनीतिक संबंधों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री विभिन्न हितधारकों के साथ भी संवाद करेंगे, जिससे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बहुआयामी संबंधों को और मजबूती मिल सके।

इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण मेलबर्न में भारतीय समुदाय के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संवाद भी है। बुधवार को ऑस्ट्रेलिया पहुँचने पर भारतीय मूल के लोगों ने उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। स्थानीय समय के अनुसार देर शाम,ठंडे मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए होटल के बाहर एकत्र हुए। स्वागत के दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारों से पूरा वातावरण गूँज उठा। प्रधानमंत्री ने भी लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए उनके उत्साह और स्नेह के लिए आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि विदेश में रहकर भी भारतीय मूल के लोग अपनी संस्कृति,परंपराओं और मातृभूमि के प्रति गहरा लगाव बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहा है और लोगों के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय समुदाय की उपलब्धियाँ न केवल ऑस्ट्रेलिया के विकास में योगदान दे रही हैं,बल्कि भारत का गौरव भी बढ़ा रही हैं।

ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए स्थानीय कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दीं,जिन्होंने दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता को दर्शाया। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई कलाकारों ने संगीत और कला के माध्यम से दोनों देशों की साझा भावनाओं को अभिव्यक्त किया। इस अवसर पर प्रस्तुत कार्यक्रमों ने वहाँ मौजूद लोगों का उत्साह और भी बढ़ा दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी ऑस्ट्रेलिया में मिले स्वागत को लेकर खुशी व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि मेलबर्न का मौसम भले ही ठंडा था,लेकिन भारतीय समुदाय के स्वागत की गर्मजोशी हमेशा याद रहने वाली है। उन्होंने कहा कि विदेश में बसे भारतीयों का भारत के प्रति प्रेम और अटूट जुड़ाव गर्व की अनुभूति कराता है। उन्होंने सभी लोगों को उनके आत्मीय स्वागत और स्नेह के लिए धन्यवाद भी दिया।

एक अन्य संदेश में प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई-भारत ऑर्केस्ट्रा द्वारा प्रस्तुत ‘माँ तुझे सलाम’ की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति बेहद भावनात्मक और प्रेरणादायक थी तथा इसने यह दिखाया कि संगीत किस प्रकार दो देशों और दो संस्कृतियों को एक-दूसरे के करीब ला सकता है। प्रधानमंत्री ने ऑर्केस्ट्रा के सभी कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी प्रस्तुति ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा दी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि यह प्रस्तुति ‘वंदे मातरम’ की वैश्विक लोकप्रियता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है,इस गीत की गूँज दुनिया के दूसरे हिस्से में सुनना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व की बात है। उनके अनुसार भारतीय संस्कृति और संगीत की यह वैश्विक स्वीकार्यता भारत की सॉफ्ट पावर को भी मजबूत करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह ऑस्ट्रेलिया यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं है,बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने का अवसर भी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध व्यापार,रक्षा,शिक्षा,ऊर्जा,तकनीक और समुद्री सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण साझेदार हैं और क्षेत्रीय स्थिरता तथा मुक्त एवं समावेशी समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों,मजबूत राजनीतिक विश्वास और लोगों के बीच गहरे जुड़ाव को देखते हुए यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों और उद्योग जगत के साथ संवाद से व्यापार,निवेश और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुलेंगे,जिससे आने वाले वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनेगी।