सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी

राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट से सोनम रघुवंशी को फिलहाल राहत,जमानत पर रोक नहीं; मेघालय सरकार से मांगे गिरफ्तारी के दस्तावेज

नई दिल्ली,9 जुलाई (युआईटीवी)- राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को उनकी जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया। हालाँकि,अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और गिरफ्तारी की प्रक्रिया की वैधता की गहन जाँच की जाएगी। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को निर्देश दिया कि वह सोनम रघुवंशी की गिरफ्तारी के समय उन्हें दिए गए मूल अरेस्ट मेमो तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई अब 14 जुलाई को होगी, जिसमें अदालत यह तय करेगी कि जमानत को चुनौती देने के लिए उठाए गए आधार कानूनी रूप से कितने मजबूत हैं।

यह मामला इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है,जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। राजा रघुवंशी मई 2025 में अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए थे। आरोप है कि इसी यात्रा के दौरान उनकी हत्या कर दी गई। जाँच एजेंसियों का दावा है कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी,जिसमें सोनम रघुवंशी और उनके कथित प्रेमी सहित अन्य लोगों की भूमिका सामने आई। इस सनसनीखेज घटनाक्रम के बाद पुलिस ने विस्तृत जाँच करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और बाद में इस मामले में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया।

सोनम रघुवंशी को पहले जमानत मिलने के बाद मेघालय सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का तर्क है कि उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में हुई एक टाइपिंग त्रुटि को अत्यधिक महत्व देते हुए जमानत को बरकरार रखा,जबकि यह केवल प्रक्रियात्मक गलती थी और इससे गिरफ्तारी की वैधता प्रभावित नहीं होती। मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विस्तार से अपना पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के लिखित आधार उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में केवल भारतीय न्याय संहिता की धारा का उल्लेख करते समय टाइपिंग की त्रुटि हो गई थी। हत्या से संबंधित धारा 103(1) का उल्लेख किए जाने के स्थान पर गलती से धारा 403(1) लिख दी गई थी। उनके अनुसार यह मात्र तकनीकी भूल थी,जिसका मामले के मूल तथ्यों या गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि इस बात पर कभी कोई विवाद नहीं रहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी दी गई थी और सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।

सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि केवल एक टाइपिंग की गलती के आधार पर गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी को राहत देना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस तकनीकी त्रुटि को गिरफ्तारी की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाने का आधार न माना जाए। साथ ही उन्होंने दस्तावेजों का टाइप किया हुआ संकलन भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति माँगी,ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।

हालाँकि,सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले को केवल तकनीकी त्रुटि तक सीमित मानने से इनकार किया। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि विचारणीय प्रश्न केवल यह नहीं है कि आरोपी को संबंधित कानूनी धाराओं की जानकारी दी गई थी या नहीं,बल्कि यह भी देखना आवश्यक है कि क्या आरोपी को गिरफ्तारी के समय मामले की सामान्य पृष्ठभूमि और आरोपों की प्रकृति के बारे में पर्याप्त रूप से अवगत कराया गया था। अदालत ने संकेत दिया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इन्हीं पहलुओं की जाँच की जाएगी।

इसी कारण सर्वोच्च न्यायालय ने मेघालय सरकार को निर्देश दिया कि वह गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मूल अरेस्ट मेमो तथा अन्य सभी संबंधित दस्तावेजों की फोटोकॉपी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करे। अदालत ने कहा कि इन दस्तावेजों के अध्ययन के बाद ही यह तय किया जाएगा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी या नहीं और जमानत को चुनौती देने के लिए प्रस्तुत किए गए आधार कितने टिकाऊ हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल उन्हें मिली जमानत जारी रहेगी और वह पहले से निर्धारित शर्तों के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया का पालन करती रहेंगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण में किसी प्रकार का अंतरिम आदेश पारित करना उचित नहीं होगा और अंतिम निर्णय दस्तावेजों तथा कानूनी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।

दूसरी ओर,सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में स्वयं को पूरी तरह निर्दोष बताया है। उन्होंने अदालत से कहा कि उन्हें इस मामले में झूठा फँसाया गया है और केवल आरोप लगाए जाने मात्र से उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जाँच एजेंसी द्वारा इस मामले में आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है और अब उनसे किसी प्रकार की बरामदगी शेष नहीं है। इसलिए उनकी हिरासत की कोई आवश्यकता नहीं है।

अपने हलफनामे में सोनम रघुवंशी ने यह भी कहा कि वह ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित सभी जमानत शर्तों का पूरी तरह पालन कर रही हैं। अदालत के निर्देशानुसार वह शिलांग में रह रही हैं और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग दे रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा किसी प्रकार के सबूतों से छेड़छाड़ किए जाने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है। इसलिए उनकी जमानत रद्द करने का कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है।

राजा रघुवंशी हत्याकांड शुरुआत से ही देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि यह हत्या पहले से रची गई साजिश का परिणाम थी,जबकि बचाव पक्ष लगातार आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्ष सुनवाई की माँग कर रहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि अदालत गिरफ्तारी की प्रक्रिया,दस्तावेजों की वैधता और जमानत को चुनौती देने के आधारों का विस्तार से परीक्षण करेगी। 14 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हैं,क्योंकि उसी के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रहेगी या इस मामले में कोई नया कानूनी मोड़ सामने आएगा।