सोनम वांगचुक (तस्वीर क्रेडिट@AshishPandeyH)

दिल्ली में छात्रों के आंदोलन को ममता बनर्जी का समर्थन,सोनम वांगचुक से फोन पर की बात

कोलकाता,15 जुलाई (युआईटीवी)- दिल्ली में छात्रों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को मंगलवार को नया राजनीतिक समर्थन मिला,जब तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। ममता बनर्जी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुने जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

ममता बनर्जी के इस कदम को आंदोलन से जुड़े लोगों ने महत्वपूर्ण समर्थन बताया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्यमंत्री के समर्थन का स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब आंदोलन लगातार जारी है और कई लोग छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं,तब एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता का समर्थन आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ाने वाला है।

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि ममता बनर्जी ने सोनम वांगचुक से फोन पर बातचीत की और उनकी सेहत के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने वांगचुक से मजबूत बने रहने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने छात्रों को न्याय दिलाने की माँग को लेकर चल रहे आंदोलन के प्रति भी अपना समर्थन दोहराया। दिपके ने कहा कि आंदोलनकारियों की ओर से ममता बनर्जी की संवेदनशीलता और समर्थन के लिए उनका धन्यवाद किया गया है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर यह आंदोलन बीस जून से जारी है। आंदोलन की शुरुआत कथित नीट परीक्षा पेपर लीक विवाद को लेकर की गई थी। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जवाबदेही तय होनी चाहिए।

आंदोलन की शुरुआत से ही लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इससे जुड़े हुए हैं। उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए इसे केवल परीक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न बताया। उन्होंने आंदोलन के दौरान कई बार यह कहा कि छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने घोषणा की थी कि यदि सत्ताईस जून तक केंद्र सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की जाती,तो वह आमरण अनशन शुरू करेंगे। निर्धारित समय तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आने के बाद उन्होंने अट्ठाईस जून से अनशन शुरू कर दिया। तब से वह लगातार आंदोलन के समर्थन में उपवास पर हैं और छात्रों के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं।

लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों,शिक्षाविदों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई लोगों ने उनसे स्वास्थ्य को देखते हुए अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने की अपील की है। इसके बावजूद उन्होंने छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से सकारात्मक पहल होने तक अपना समर्थन जारी रखने का संकेत दिया है।

आंदोलन के मुख्य चेहरों में शामिल अभिजीत दिपके भी जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवाद ने देशभर के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को प्रभावित किया है। उनका आरोप है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है,तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी माँग को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के समर्थन से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा मिल सकती है। हालाँकि,इस पूरे मामले में केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आंदोलनकारी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुने और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन अब कई सप्ताह से लगातार चल रहा है और इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र,सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि समय-समय पर शामिल होते रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ से अधिक छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रखना है।

ममता बनर्जी द्वारा दिए गए समर्थन के बाद आंदोलन को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली है। वहीं,सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी लगातार बढ़ रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और इस लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शन का समाधान किस प्रकार निकलता है।