अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बदला अमेरिका का रुख,टोल शुल्क का फैसला वापस लेकर व्यापार और निवेश समझौतों पर दिया जोर

वाशिंगटन,15 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत टोल शुल्क लगाने के अपने विवादास्पद फैसले से पीछे हटते हुए नई आर्थिक रणनीति का ऐलान किया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना और कई देशों की आपत्तियों के बाद ट्रंप प्रशासन ने अब इस प्रस्तावित टोल व्यवस्था को लागू न करने का फैसला किया है। इसके स्थान पर अमेरिका ने खाड़ी देशों के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार और निवेश समझौतों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है। ट्रंप का कहना है कि यह नया मॉडल अमेरिका और मध्य पूर्व के सहयोगी देशों दोनों के लिए अधिक लाभकारी साबित होगा और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर जारी संदेश में कहा कि मध्य पूर्व के नेताओं के साथ हुई सकारात्मक बातचीत के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है कि प्रस्तावित 20 प्रतिशत टोल शुल्क को हटाकर उसकी जगह व्यापक व्यापार और निवेश साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। उनके अनुसार,खाड़ी देशों की सरकारें और वहाँ की प्रमुख कंपनियाँ अमेरिका में बड़े स्तर पर निवेश करेंगी, जिससे दोनों पक्षों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न केवल आर्थिक विकास को गति देगी,बल्कि क्षेत्रीय साझेदारी को भी मजबूत बनाएगी।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी समुद्री सुरक्षा नीति में बदलाव नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में निगरानी और सुरक्षा पहले की तरह जारी रहेगी, लेकिन अब सभी जहाजों पर टोल लगाने की योजना लागू नहीं होगी। इसके बजाय केवल उन जहाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी,जिनका संबंध ईरान से होगा या जो ईरानी बंदरगाहों से आ-जा रहे होंगे अथवा जिनमें ईरान से जुड़ा माल या सामान होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका पूरी तरह से नाकाबंदी लागू करेगा,लेकिन यह केवल ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार तक सीमित रहेगी।

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की संयुक्त रणनीति के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अब लगभग सभी देशों के लिए सुरक्षित और खुला है। उन्होंने कहा कि केवल ईरान से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध रहेगा,जबकि बाकी देशों के जहाज सामान्य रूप से इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसकी नीतियों ने क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दिया है और देश को गंभीर आर्थिक एवं राजनीतिक संकट की ओर धकेल दिया है।

अपने बयान में ट्रंप ने अमेरिकी सेना की भूमिका की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का श्रेय अमेरिकी सशस्त्र बलों को जाता है। उन्होंने विशेष रूप से रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ,ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन तथा अमेरिका के सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की प्रशंसा की। ट्रंप ने कहा कि इन अधिकारियों के नेतृत्व और अमेरिकी सैनिकों की प्रतिबद्धता के कारण समुद्री मार्ग सुरक्षित बना हुआ है और वैश्विक व्यापार को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका में पहले से ही कई देशों द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है,लेकिन नए समझौतों के बाद यह निवेश और तेजी से बढ़ेगा। उनके अनुसार,आने वाले समय में अमेरिका में नई फैक्ट्रियाँ,औद्योगिक संयंत्र और आधुनिक विनिर्माण इकाइयां स्थापित होंगी। इससे लाखों नए रोजगार पैदा होंगे और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। ट्रंप ने कहा कि यह निवेश केवल आर्थिक आँकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि देश के औद्योगिक विकास और तकनीकी प्रगति को भी नई गति देगा।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की ऊर्जा नीति और सुरक्षा रणनीति के कारण तेल उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुका है। ट्रंप ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और मजबूत रक्षा व्यवस्था ने अमेरिका को पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली बनाया है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका अब पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है और वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक तथा सामरिक भूमिका को और प्रभावी ढंग से निभाने के लिए तैयार है।

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरानी नेतृत्व लंबे समय से हिंसक गतिविधियों और अस्थिरता को बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाता रहेगा और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा।

टोल शुल्क वापस लेने के फैसले को कई विश्लेषक अमेरिका की व्यावहारिक कूटनीति के रूप में देख रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है,जहाँ से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है। ऐसे में इस मार्ग पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव से वैश्विक व्यापार,ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन की लागत पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। कई देशों ने इस प्रस्ताव को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था के विपरीत बताया था।

विशेष रूप से इटली ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया था। इटली सरकार का कहना था कि होर्मुज जलडमरूमध्य कोई मानव निर्मित संरचना नहीं है,बल्कि एक प्राकृतिक अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग है। इसलिए इस पर किसी एक देश द्वारा टोल शुल्क लगाया जाना उचित नहीं माना जा सकता। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनका देश समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र और निर्बाध आवाजाही का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि जिन जलडमरूमध्यों का निर्माण प्राकृतिक रूप से हुआ है, वहाँ किसी भी प्रकार का शुल्क लगाना अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका अपने पुराने प्रस्ताव पर कायम रहता, तो इससे वैश्विक व्यापारिक समुदाय में असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती थी। तेल आयात करने वाले देशों के लिए परिवहन लागत बढ़ती और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता देखने को मिलती। इसी कारण अमेरिका द्वारा व्यापार और निवेश आधारित विकल्प अपनाने को अपेक्षाकृत संतुलित कदम माना जा रहा है।

ट्रंप प्रशासन का नया रुख यह संकेत देता है कि अमेरिका अब अपने रणनीतिक सहयोगियों के साथ आर्थिक साझेदारी को सुरक्षा नीति के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना चाहता है। खाड़ी देशों के साथ निवेश और व्यापार समझौतों के माध्यम से वह एक ओर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना चाहता है,वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति भी जारी रखना चाहता है।

आने वाले समय में इन प्रस्तावित निवेश समझौतों का स्वरूप और उनके आर्थिक प्रभाव स्पष्ट होंगे। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल शुल्क लगाने की योजना वापस लेने से वैश्विक व्यापार जगत को राहत मिली है। साथ ही अमेरिका ने यह संकेत भी दिया है कि वह आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से अपने हितों को आगे बढ़ाने की नीति पर अधिक जोर देगा,जबकि ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार पर प्रतिबंध और निगरानी पहले की तरह जारी रहेगी।