कांगो में इबोला का कहर (तस्वीर क्रेडिट@zeus_saitama)

डीआरसी में इबोला के खिलाफ 180 दिन की नई रणनीति, 1.3 अरब डॉलर की जरूरत

किंशासा,5 सितंबर (युआईटीवी)- डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला महामारी के लगातार बढ़ते खतरे के बीच सरकार और उसके सहयोगियों ने संक्रमण की रोकथाम और प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए 180 दिन की नई बहुक्षेत्रीय प्रतिक्रिया योजना शुरू की है। इस विस्तृत अभियान को अगले छह महीनों के दौरान इबोला के खिलाफ चलाए जाने वाले प्रयासों का संचालनात्मक रोडमैप माना जा रहा है। योजना को पूरी तरह लागू करने के लिए करीब 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर की जरूरत का अनुमान लगाया गया है।

इस अभियान में डीआरसी सरकार के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन, अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन और अन्य अंतर्राष्ट्रीय तथा मानवीय साझीदार शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित रहकर इबोला से मुकाबला करना नहीं है, बल्कि समुदायों, सरकारी एजेंसियों, मानवीय संगठनों, दानदाताओं और अन्य संबंधित संस्थाओं को एक साझा रणनीति के तहत जोड़ना है। अधिकारियों का मानना है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए तेजी से जाँच,संक्रमित लोगों का समय पर इलाज,संपर्कों की पहचान और समुदायों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।

अफ्रीका के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, 2 सितंबर तक बुंडीबुग्यो वायरस के कारण फैले मौजूदा प्रकोप में 6,342 मामले सामने आ चुके थे, जबकि 3,072 लोगों की मौत हो चुकी थी। संक्रमण छह प्रांतों के 60 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल गया है। इतनी बड़ी संख्या में मामले और मौतें स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती पैदा कर रही हैं। अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि संक्रमण के कारण होने वाली बड़ी संख्या में मौतें अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं,बल्कि समुदायों के भीतर हो रही हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक कई ऐसे लोग भी बीमारी की चपेट में आकर दम तोड़ रहे हैं,जिनकी पहचान पहले संपर्क के रूप में नहीं हुई थी। ऐसे मरीज अक्सर बीमारी की गंभीर स्थिति में पहुँचने से पहले किसी स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुँच पाते। इसके चलते संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले अन्य लोगों की पहचान भी समय पर नहीं हो पाती और संक्रमण के फैलाव को रोकना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि नई प्रतिक्रिया योजना में समुदाय स्तर पर निगरानी,संपर्कों की पहचान और समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।

डीआरसी में विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यकारी प्रतिनिधि ऐनी एंसिया ने कहा कि संक्रमण से निपटने में हर देरी भारी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि जब किसी मामले का बहुत देर से पता चलता है,किसी संपर्क की पहचान नहीं हो पाती या आवश्यक संसाधन जुटाने में देरी होती है,तो इसका सीधा असर लोगों की जान पर पड़ता है। उनके अनुसार, इबोला के खिलाफ अभियान को तेज और प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रत्येक स्तर पर त्वरित कार्रवाई जरूरी है।

डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने भी कहा कि मौजूदा प्रकोप पर काबू पाने के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। उन्होंने समुदायों,सरकारी एजेंसियों, अंतर्राष्ट्रीय साझीदारों और दानदाताओं को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि सरकार कांगो के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और महामारी को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएँगे।

नई 180-दिन की योजना में संसाधनों की उपलब्धता को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार,संशोधित योजना को पूरी तरह लागू करने के लिए लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी। इतनी बड़ी धनराशि की जरूरत इस बात को दर्शाती है कि महामारी से मुकाबला केवल चिकित्सा सेवाओं तक सीमित नहीं है। इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने,चिकित्सकीय सामग्री और दवाओं की आपूर्ति बनाए रखने, निगरानी व्यवस्था को बढ़ाने,प्रभावित समुदायों तक पहुँच बनाने और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी पर्याप्त संसाधनों की जरूरत होगी।

डीआरसी में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर डेमियन मामा ने कहा कि इबोला से निपटने के प्रयासों को व्यापक मानवीय अभियान का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस काम के लिए पर्याप्त,लचीली और पूर्वानुमान योग्य वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उनका कहना है कि महामारी की स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध धन और संसाधनों में भी जरूरत के अनुसार बदलाव करने की क्षमता होनी चाहिए।

अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी डीआरसी में राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे प्रयासों को लगातार समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है। संगठन की भूमिका में संसाधन जुटाने,विभिन्न साझीदारों के बीच समन्वय मजबूत करने और समुदायों की भागीदारी बढ़ाने जैसे प्रयास शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि महामारी को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों का भरोसा हासिल करना और उन्हें बीमारी की पहचान,बचाव तथा उपचार से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है।

मौजूदा इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा मई में की गई थी। इसके बाद से संक्रमण जिस तेजी से फैला है,उसने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। इसे डीआरसी में अब तक का सबसे तेजी से बढ़ने वाला इबोला प्रकोप बताया जा रहा है। छह प्रांतों के 60 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुँच चुके संक्रमण के कारण आने वाले महीनों में प्रतिक्रिया अभियान को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है,जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैल सकती है। बीमारी के प्रसार को रोकने में शुरुआती पहचान,संक्रमित मरीजों का पृथक्करण,उपचार और संपर्कों की निगरानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में डीआरसी की नई 180-दिन की योजना का मुख्य लक्ष्य संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना और समुदाय स्तर पर बीमारी के कारण होने वाली मौतों को कम करना है।

डीआरसी सरकार और उसके अंतर्राष्ट्रीय साझीदारों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध संसाधनों को तेजी से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचाने और योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की है। अधिकारियों का मानना है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी तंत्र,स्थानीय समुदायों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के बीच बेहतर तालमेल कायम किया जाता है,तो इबोला के बढ़ते प्रकोप पर नियंत्रण पाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की जा सकती है। अगले 180 दिन इस अभियान के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।