ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज

ट्रंप के बयान के बाद ऑस्ट्रेलिया की शांति अपील,अल्बानीज बोले—अब युद्ध खत्म करने का वक्त है

कैनबरा,3 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऑस्ट्रेलिया ने संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाते हुए युद्ध को लेकर चिंता जताई है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद तनाव कम करने की अपील की है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि अमेरिका अपने घोषित रणनीतिक लक्ष्यों को लगभग हासिल कर चुका है,तो अब आगे युद्ध जारी रखने का औचित्य स्पष्ट नहीं है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को शांति की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

कैनबरा में मीडिया से बातचीत के दौरान अल्बानीज ने कहा कि ट्रंप का बयान ऐसे समय आया जब वे स्वयं प्रेस से बात कर रहे थे,इसलिए उस पर तत्काल प्रतिक्रिया देना आसान नहीं था। उन्होंने यह जरूर कहा कि जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी,तब जिन उद्देश्यों का जिक्र किया गया था,वे काफी हद तक पूरे होते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अब आगे क्या हासिल करना बाकी है और इस सैन्य अभियान का अंतिम लक्ष्य क्या होगा।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय तक चलने वाला युद्ध केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ही नहीं,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध जितना लंबा खिंचेगा,उसका असर ऊर्जा बाजार, व्यापार और निवेश पर उतना ही अधिक पड़ेगा। ऐसे में सभी पक्षों को संयम बरतते हुए कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

दरअसल,ट्रंप ने अपने हालिया संबोधन में दावा किया था कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अमेरिका अपने मुख्य रणनीतिक लक्ष्यों के करीब पहुँच चुका है। हालाँकि,उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि यदि स्थिति अनुकूल नहीं होती,तो अमेरिका और कठोर कदम उठा सकता है। इस दोहरे संदेश ने वैश्विक स्तर पर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है,जिसके चलते कई देशों ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है।

अल्बानीज ने अपने बयान में सीधे तौर पर ट्रंप की आलोचना करने से परहेज किया,लेकिन उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया का रुख शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देने का है। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान अंततः बातचीत और समझौते के जरिए ही संभव है,न कि लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों से।

इस बीच,जब उनसे एयूकेयूएस साझेदारी को लेकर सवाल किया गया,तो उन्होंने इस मुद्दे पर भी संतुलित जवाब दिया। ट्रंप द्वारा नाटो और अन्य सहयोगी देशों को लेकर दिए गए बयानों के संदर्भ में पूछा गया कि क्या इससे एयूकेयूएस को मिलने वाले जनसमर्थन पर असर पड़ेगा,तो अल्बानीज ने कहा कि उनका काम वैश्विक नेताओं के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाए रखना है।

उन्होंने कहा कि एक प्रधानमंत्री के रूप में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि ऑस्ट्रेलिया के हितों की रक्षा हो और इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत संबंध बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि उनकी ट्रंप के साथ अब तक तीन बार आमने-सामने मुलाकात हो चुकी है और कई बार फोन पर भी बातचीत हुई है। यह संवाद इसलिए जरूरी है,क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूती मिलती है।

अल्बानीज ने यह भी कहा कि उनकी सरकार को इस बात पर गर्व है कि उसने पारंपरिक साझेदारों जैसे अमेरिका और ब्रिटेन के साथ संबंधों को मजबूत किया है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया केवल इन्हीं संबंधों तक सीमित नहीं है,बल्कि उसने एशिया और प्रशांत क्षेत्र में भी अपने कूटनीतिक दायरे का विस्तार किया है।

उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने चीन के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं,जो हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे थे। इसके अलावा,आसियान देशों के साथ भी सहयोग को मजबूत किया गया है। दक्षिण कोरिया और जापान जैसे उत्तर एशियाई व्यापारिक साझेदारों के साथ भी ऑस्ट्रेलिया के संबंध लगातार बेहतर हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि पैसिफिक आइलैंड फोरम में ऑस्ट्रेलिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है,जिससे क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा मिल रही है। इसके साथ ही उन्होंने उभरती हुई शक्तियों जैसे भारत और इंडोनेशिया के साथ संबंधों को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन देशों के साथ सहयोग के जरिए आर्थिक और रणनीतिक अवसरों को बढ़ाया जा सकता है।

अल्बानीज का यह बयान ऐसे समय आया है,जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में संघर्ष,तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने कई देशों को चिंतित कर दिया है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया का यह संतुलित और कूटनीतिक रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक संकेत है कि संवाद और सहयोग ही आगे का रास्ता हो सकता है।

ऑस्ट्रेलिया ने इस पूरे घटनाक्रम में न तो किसी पक्ष का खुला समर्थन किया है और न ही किसी की सीधी आलोचना की है,बल्कि उसने शांति,स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है और क्या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय मिलकर इस संकट का समाधान निकाल पाता है या नहीं।