ट्रंप ने ‘यूएस स्पेस एकेडमी’ बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का किया ऐलान (तस्वीर क्रेडिट@RyanChandlerTV)

चाँद से मंगल तक अमेरिका की नई तैयारी, ट्रंप ने ‘यूएस स्पेस एकेडमी’ बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का किया ऐलान

वाशिंगटन,29 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की महत्वाकांक्षी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को चाँद और उससे आगे के अभियानों के लिए अंतरिक्ष विशेषज्ञों,इंजीनियरों और प्रशिक्षित पेशेवरों की एक पूरी पीढ़ी तैयार करनी होगी। इसी उद्देश्य से ट्रंप ने देश की पहली विशेष अंतरिक्ष अकादमी के गठन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक राष्ट्रपति आयोग बनाने का आदेश दिया है। प्रस्तावित संस्थान का नाम ‘यूएस स्पेस एकेडमी’ रखा गया है और इसे अमेरिका की मौजूदा प्रतिष्ठित सैन्य सेवा अकादमियों के स्तर का बनाने की योजना है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी स्पेस फोर्स और वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिका की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं भी चांद तक सीमित नहीं हैं,बल्कि चाँद से आगे के अभियानों और भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुँचने की दिशा में बढ़ रही हैं। ऐसे में देश के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन तैयार करना आवश्यक हो गया है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को कुशल सेवा सदस्यों,इंजीनियरों और नागरिक क्षेत्र में काम करने वाले अंतरिक्ष पेशेवरों की पूरी पीढ़ी को शिक्षित और प्रशिक्षित करने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से उन्होंने नई राष्ट्रीय अकादमी की स्थापना की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणा को अमेरिका की अंतरिक्ष नीति में मानव संसाधन विकास पर बढ़ते जोर के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति ने जिस आदेश पर हस्ताक्षर किए,उसके तहत यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस एकेडमी पर एक राष्ट्रपति आयोग का गठन किया जाएगा। प्रस्तावित संस्थान का नेतृत्व नासा करेगा और इसे केवल तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसमें नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा से जुड़े प्रशिक्षण को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसे पेशेवर तैयार करना होगा,जो अंतरिक्ष अभियानों के तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ नेतृत्व और सेवा की जिम्मेदारियों को भी प्रभावी ढंग से सँभाल सकें।

इस आयोग की अध्यक्षता नासा के प्रशासक जेरेड आइजैकमैन करेंगे,जबकि नासा के उप प्रशासक मैट एंडरसन इसके कार्यकारी निदेशक के रूप में जिम्मेदारी सँभालेंगे। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 120 दिनों का समय दिया गया है। इस अवधि के दौरान पैनल अकादमी के संचालन और प्रशासन की संरचना से लेकर पाठ्यक्रम और प्रवेश प्रक्रिया तक कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करेगा।

आयोग को अकादमी के शासन ढाँचे,पाठ्यक्रम,प्रवेश आवश्यकताओं और स्नातक होने के बाद सेवा दायित्वों से संबंधित सिफारिशें तैयार करनी होंगी। इसके अलावा अकादमी के स्थायी परिसर के लिए उपयुक्त स्थान का चयन भी आयोग की जिम्मेदारियों में शामिल होगा। पायलट कार्यक्रमों,विभिन्न संस्थानों के साथ साझेदारी, आवश्यक कानून और अकादमी को लागू करने की प्रक्रिया पर भी आयोग अपनी रिपोर्ट देगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि नई अकादमी का स्तर अमेरिका की मौजूदा प्रतिष्ठित सेवा अकादमियों के बराबर होना चाहिए। उन्होंने वेस्ट प्वाइंट,एनापोलिस,कोस्ट गार्ड एकेडमी और एयर फोर्स एकेडमी का उदाहरण देते हुए कहा कि नई अंतरिक्ष अकादमी को भी उसी स्तर की प्रतिष्ठा और कठिन प्रशिक्षण के लिए जाना जाना चाहिए।

ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतनी बड़ी पहल करने जा रहा है,तो संस्थान का स्तर भी बेहद ऊँचा होना चाहिए। उन्होंने अमेरिका की मौजूदा सेवा अकादमियों को देश के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल बताते हुए कहा कि नई अंतरिक्ष अकादमी भी उसी मानक को हासिल करे,यही उनकी इच्छा है। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित संस्थान को केवल एक सामान्य तकनीकी विश्वविद्यालय के रूप में नहीं,बल्कि उच्च चयन मानकों और कठोर प्रशिक्षण वाली राष्ट्रीय संस्था के रूप में विकसित करने की योजना है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों से बातचीत के दौरान भी इस योजना का उल्लेख किया। इस बातचीत में उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे अमेरिकी कर्मियों को भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित अकादमी भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए जरूरी प्रतिभाओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस दौरान ट्रंप ने नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन,जेसिका मायर और जैक हैथवे का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इन अंतरिक्ष यात्रियों को महान अमेरिकी,देशभक्त और बहादुर लोग बताया। इनमें अनिल मेनन भारतीय और यूक्रेनी प्रवासियों के बेटे हैं और वर्तमान में अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ट्रंप द्वारा उनके योगदान का विशेष उल्लेख भारतीय मूल के लोगों की अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम में बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।

अंतरिक्ष स्टेशन पर सेवा दे रहे और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर कार्यरत अनिल मेनन ने भी नई अकादमी की योजना का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्पेस फोर्स में कर्नल के रूप में उन्हें दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्र में सेवा करने पर गर्व है। मेनन ने अंतरिक्ष में अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें हाल ही में स्पेसवॉक करने का अवसर मिला था।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से रोबोटिक आर्म के जरिए अंतरिक्ष स्टेशन को देखने और वहाँ मौजूद असाधारण प्रतिभा तथा तकनीकी क्षमता का अनुभव करने के बाद वह इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि अमेरिका अब चाँद,चाँद पर आधार स्थापित करने और मंगल ग्रह तक अपनी अगली यात्रा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए अत्याधुनिक तकनीक के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

ट्रंप ने अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर लौटने के बाद ओवल ऑफिस आने का निमंत्रण भी दिया। यह कार्यक्रम केवल नई अकादमी की घोषणा तक सीमित नहीं था,बल्कि इसमें अमेरिका के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों और अंतरिक्ष यात्रियों के योगदान को सम्मानित करने पर भी जोर दिया गया।

ह्यूस्टन में आयोजित समारोह के दौरान ट्रंप ने आर्टेमिस-2 मिशन के चार सदस्यों को कांग्रेशनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर प्रदान किया। सम्मानित अंतरिक्ष यात्रियों में रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन शामिल थे। आर्टेमिस-2 मिशन अमेरिका के चंद्र अभियान कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण चरण रहा है।

आर्टेमिस-2 मिशन को 1 अप्रैल को प्रक्षेपित किया गया था और 10 अप्रैल को चंद्रमा के पास से उड़ान भरने के बाद इसका समुद्र में सफल अवतरण हुआ। नासा के अनुसार, इस मिशन के चालक दल ने पृथ्वी से लगभग 2,52,756 मील की दूरी तय की,जो उनसे पहले किसी भी इंसान द्वारा तय की गई दूरी से अधिक थी। पूरे मिशन के दौरान चालक दल ने लगभग 6,95,081 मील की यात्रा की।

आर्टेमिस-2 मिशन की सफलता को अमेरिका के चंद्र अभियानों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। यह मिशन भविष्य के मानवयुक्त चंद्र अभियानों के लिए तकनीकी और परिचालन अनुभव जुटाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। चाँद पर दोबारा मानवों की पहुँच, वहाँ आधारभूत ढाँचे के विकास और भविष्य में मंगल ग्रह तक अभियान भेजने की अमेरिकी महत्वाकांक्षा के लिए ऐसे मिशनों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आर्टेमिस-2 के चारों सदस्य वर्ष 2023 के बाद कांग्रेशनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर पाने वाले पहले प्राप्तकर्ता बने। इस सम्मान के जरिए उनके मिशन और अंतरिक्ष अन्वेषण में योगदान को मान्यता दी गई। समारोह में ट्रंप ने अंतरिक्ष यात्रियों के साहस और उपलब्धियों की सराहना करते हुए अमेरिका के अंतरिक्ष कार्यक्रम के भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।

नई अंतरिक्ष अकादमी की योजना को अमेरिका की सैन्य और नागरिक अंतरिक्ष क्षमताओं के बीच तालमेल बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के गठन के बाद अंतरिक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा के एक अलग और महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जाने लगा है। ट्रंप ने दिसंबर 2019 में अमेरिकी स्पेस फोर्स को अमेरिकी सशस्त्र सेवाओं की छठी शाखा के रूप में स्थापित किया था।

हालाँकि,प्रस्तावित यूएस स्पेस एकेडमी केवल सैन्य जरूरतों को पूरा करने वाली संस्था नहीं होगी। इसकी परिकल्पना नासा के नेतृत्व वाले ऐसे संघीय संस्थान के रूप में की गई है, जो सैन्य,नागरिक और वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिभाएं तैयार करेगा। इसका मतलब है कि यहाँ से निकलने वाले पेशेवरों के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान,सरकारी एजेंसियों,रक्षा क्षेत्र और तेजी से बढ़ते वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग में काम करने के अवसर हो सकते हैं।

अमेरिका का वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र भी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। निजी कंपनियां प्रक्षेपण सेवाओं,उपग्रहों,अंतरिक्ष संचार और अन्य तकनीकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में सरकार और निजी क्षेत्र दोनों के लिए प्रशिक्षित इंजीनियरों, वैज्ञानिकों,तकनीकी विशेषज्ञों और नेतृत्व क्षमता वाले पेशेवरों की माँग बढ़ने की संभावना है।

प्रस्तावित अकादमी इस बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए एक संगठित राष्ट्रीय मंच उपलब्ध करा सकती है। यदि आयोग की सिफारिशों के आधार पर संस्थान स्थापित होता है, तो इसमें तकनीकी शिक्षा के साथ नेतृत्व,अनुशासन,सार्वजनिक सेवा और अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी व्यावहारिक ट्रेनिंग को एक साथ जोड़ा जा सकता है। इससे अमेरिका को लंबे समय तक चलने वाले चंद्र और मंगल अभियानों के लिए विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर,राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूएस स्पेस एकेडमी बनाने की घोषणा अमेरिका की दीर्घकालिक अंतरिक्ष रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। चाँद पर वापसी, चंद्र आधार की संभावनाओं और भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन की तैयारी के बीच अमेरिका अब केवल अंतरिक्ष यान और तकनीक विकसित करने पर ही नहीं,बल्कि उन्हें संचालित करने वाली प्रतिभाओं को तैयार करने पर भी जोर दे रहा है। नई अकादमी यदि प्रस्तावित स्वरूप में विकसित होती है,तो यह सैन्य,नागरिक और वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है और आने वाले दशकों में अमेरिका की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की एक नई पीढ़ी तैयार कर सकती है।