वॉशिंगटन,2 जुलाई (युआईटीवी)- चीन की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ग्रुप और अमेरिका में उसकी पेमेंट प्रोसेसिंग इकाई एयूएस मर्चेंट सर्विसेज ने अमेरिकी न्याय विभाग के साथ एक बड़े कानूनी समझौते पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत दोनों कंपनियाँ कुल 60 करोड़ डॉलर का भुगतान करेंगी। यह राशि उन आरोपों के निपटारे के लिए तय की गई है,जिनमें कहा गया था कि दोनों कंपनियाँ अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिका में गैर-कानूनी दवाओं, प्रतिबंधित रसायनों और नकली दवाएँ बनाने वाले उपकरणों की बिक्री तथा आयात को रोकने में विफल रहीं। यह मामला वैश्विक ई-कॉमर्स उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियों को अपने ऑनलाइन बाजारों पर होने वाली गतिविधियों की जवाबदेही भी उठानी होगी।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार,यह मामला ‘नॉन-प्रॉसिक्यूशन एग्रीमेंट’ यानी मुकदमा न चलाने के समझौते के तहत सुलझाया गया है। इस व्यवस्था के तहत कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जाएगा,लेकिन उन्हें भारी आर्थिक दंड भरने के साथ-साथ अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार करने होंगे। दोनों कंपनियों ने समझौते की शर्तों को स्वीकार करते हुए भविष्य में अमेरिकी कानूनों का सख्ती से पालन करने और जाँच एजेंसियों के साथ सहयोग जारी रखने का भी वादा किया है।
समझौते के तहत अलीबाबा 12.5 करोड़ डॉलर का आपराधिक जुर्माना अदा करेगी। इसके अलावा कंपनी 19 करोड़ डॉलर की राशि जब्त कराएगी। वहीं एयूएस मर्चेंट सर्विसेज 8.5 करोड़ डॉलर का आपराधिक जुर्माना भरेगी और 19 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि जब्त कराएगी। इस प्रकार दोनों कंपनियों की ओर से कुल 60 करोड़ डॉलर का भुगतान किया जाएगा,जो हाल के वर्षों में ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय समझौतों में से एक माना जा रहा है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने अपनी जाँच में कहा कि जनवरी 2016 से दिसंबर 2024 के बीच अलीबाबा अपने दो प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अलीबाबा डॉट कॉम और अलीएक्सप्रेस का उपयोग करने वाले व्यापारियों को अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करते हुए अमेरिका में प्रतिबंधित दवाएँ,सूचीबद्ध रसायन और नकली दवाएँ बनाने वाले उपकरण भेजने से रोकने में असफल रही। जाँच एजेंसियों के अनुसार इन लेन-देन का कुल व्यापार मूल्य 20 करोड़ डॉलर से अधिक था,जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
जाँच के दौरान अमेरिकी संघीय एजेंटों ने गुप्त अभियान भी चलाया। अधिकारियों ने 40 से अधिक बार ऐसे उत्पादों की गुप्त खरीदारी की,जिनका अमेरिका में आयात पूरी तरह प्रतिबंधित था। इन खरीदों में गैर-कानूनी दवाएँ,नियंत्रित रसायन और नकली दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण शामिल थे। इन अभियानों का उद्देश्य यह जांचना था कि क्या कंपनी के सुरक्षा और निगरानी तंत्र ऐसे उत्पादों की बिक्री को रोकने में सक्षम हैं। जाँच के परिणामों से यह सामने आया कि कई मामलों में प्रतिबंधित उत्पाद आसानी से उपलब्ध थे और उन्हें खरीदने की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत सरल थी।
अमेरिकी न्याय विभाग ने यह भी कहा कि अलीबाबा के पास ऐसे उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए औपचारिक नीतियाँ और दिशा-निर्देश मौजूद थे, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर उनका प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया गया। जाँच में यह भी सामने आया कि कंपनी के कई कर्मचारियों ने आंतरिक रूप से यह चिंता व्यक्त की थी कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने वाली व्यवस्थाएँ पर्याप्त नहीं हैं। इसके बावजूद समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए,जिससे प्रतिबंधित गतिविधियाँ जारी रहीं।
जाँच एजेंसियों के अनुसार कुछ व्यापारियों ने अलीबाबा की आंतरिक संदेश सेवा का उपयोग करके खरीदारों के साथ प्रतिबंधित लेन-देन को आसान बनाया। कई मामलों में खरीदारों को प्लेटफॉर्म से हटाकर एन्क्रिप्टेड थर्ड-पार्टी मैसेजिंग सेवाओं पर भेज दिया गया,जहाँ प्रतिबंधित उत्पादों की खरीद-बिक्री से जुड़ी बातचीत होती थी। इससे जाँच एजेंसियों के लिए लेन-देन की निगरानी करना और भी कठिन हो गया।
समझौते में अलीबाबा ने यह भी स्वीकार किया कि उसने कुछ व्यापारियों से सदस्यता शुल्क,विज्ञापन शुल्क,विपणन सेवाओं,शिपिंग और भुगतान प्रसंस्करण जैसी विभिन्न सेवाओं के माध्यम से आय अर्जित की। हालाँकि,कंपनी ने यह नहीं माना कि उसने जानबूझकर गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा दिया,लेकिन उसने यह स्वीकार किया कि उसकी निगरानी व्यवस्था इन गतिविधियों को रोकने में पर्याप्त प्रभावी नहीं थी।
दूसरी ओर एयूएस मर्चेंट सर्विसेज के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए गए। कंपनी ने स्वीकार किया कि जनवरी 2020 से दिसंबर 2023 के बीच उसका एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग अनुपालन कार्यक्रम कुछ अलीबाबा व्यापारियों को अमेरिकी खरीदारों को प्रतिबंधित उत्पाद बेचने के लिए उसकी भुगतान सेवाओं का उपयोग करने से रोकने में असफल रहा। जाँच में पाया गया कि कंपनी का लेन-देन निगरानी तंत्र कुछ महत्वपूर्ण वायर ट्रांसफर आँकड़ों को शामिल नहीं कर पा रहा था। इसके कारण अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों से जुड़े या कई अलग-अलग भुगतानकर्ताओं द्वारा किए गए कुछ संदिग्ध भुगतानों की समय पर पहचान नहीं हो सकी।
जाँच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ मामलों में एयूएस मर्चेंट सर्विसेज ने संदिग्ध गतिविधियों की जाँच करने के बाद अलीबाबा को इसकी जानकारी भी दी थी,लेकिन इसके बावजूद संबंधित व्यापारियों ने प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री जारी रखी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि दोनों कंपनियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया और उसके बाद उठाए जाने वाले कदम पर्याप्त प्रभावी नहीं थे।
अमेरिकी न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के सहायक अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा कि यह समझौता इस बात का स्पष्ट संकेत है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियों को अपने ऑनलाइन बाजारों को सुरक्षित बनाना होगा। उन्होंने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान सेवाएँ गैर-कानूनी,बिना मंजूरी वाली,गलत ब्रांडिंग वाली और खतरनाक विदेशी दवाओं की बिक्री का माध्यम न बनें। उनके अनुसार उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कोई भी कंपनी इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
अमेरिकी न्याय विभाग के आपराधिक प्रभाग के सहायक अटॉर्नी जनरल टाइसन डुवा ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि नियमों का प्रभावी पालन नहीं किया जाए तो अपराधी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान सेवाओं का दुरुपयोग रोकना कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्राथमिकता है। उनके अनुसार अलीबाबा और एयूएस ने अपनी स्क्रीनिंग प्रक्रिया,निगरानी प्रणाली और अनुपालन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाने की जानकारी दी है और भविष्य में भी अमेरिकी एजेंसियों के साथ सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया है।
समझौते के तहत दोनों कंपनियों ने अपने अधिकारियों,निदेशकों,कर्मचारियों और एजेंटों की गतिविधियों के लिए संस्थागत जिम्मेदारी स्वीकार की है। उन्होंने यह भी सहमति व्यक्त की है कि वे अपने अनुपालन कार्यक्रमों को और अधिक मजबूत बनाएँगी,लेन-देन की निगरानी व्यवस्था में तकनीकी सुधार करेंगी तथा भविष्य में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान कर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। इसके अलावा चल रही और भविष्य की किसी भी जाँच में अमेरिकी अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग देने की भी प्रतिबद्धता जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल अलीबाबा तक सीमित नहीं है,बल्कि दुनिया भर के सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। इंटरनेट आधारित कारोबार के तेजी से विस्तार के साथ-साथ यह चुनौती भी बढ़ी है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल गैर-कानूनी उत्पादों,नकली सामान और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के लिए न हो। ऐसे में कंपनियों के लिए केवल नीतियाँ बनाना पर्याप्त नहीं है,बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और लगातार निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।
अलीबाबा की स्थापना वर्ष 1999 में चीन में हुई थी और आज यह दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में शामिल है। कंपनी का अलीबाबा डॉट कॉम प्लेटफॉर्म वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े बिजनेस-टू-बिजनेस ऑनलाइन मार्केटप्लेस में से एक माना जाता है, जबकि अलीएक्सप्रेस दुनिया भर के उपभोक्ताओं को विभिन्न देशों के विक्रेताओं से जोड़ने वाला प्रमुख ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म है। कंपनी के शेयर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज दोनों में सूचीबद्ध हैं,जिससे इसकी वैश्विक उपस्थिति और निवेशकों के बीच महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है,जब दुनिया भर की नियामक एजेंसियां डिजिटल कारोबार करने वाली कंपनियों की जवाबदेही को लेकर पहले से अधिक सख्त रुख अपना रही हैं। उपभोक्ताओं की सुरक्षा,वित्तीय अपराधों की रोकथाम,मनी लॉन्ड्रिंग पर नियंत्रण और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकना अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है। ऐसे में अलीबाबा और एयूएस मर्चेंट सर्विसेज के साथ हुआ यह समझौता केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं,बल्कि वैश्विक ई-कॉमर्स उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी माना जा रहा है कि यदि कंपनियाँ अपने प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त निगरानी और अनुपालन व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करेंगी,तो उन्हें भविष्य में कड़े कानूनी और वित्तीय परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
