चेंगलपट्टू (तमिलनाडु),16 जून (युआईटीवी)- तमिलनाडु की राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े एक चर्चित मामले में सोमवार को महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक मामले की सुनवाई चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में हुई,जहाँ अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें अगली तारीख पर टिक गई हैं,जब यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों पक्ष अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे या फिर किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अपनी बात रखेंगे।
यह मामला पिछले वर्ष तब सुर्खियों में आया था,जब संगीता ने 23 दिसंबर को चेंगलपट्टू जिला अदालत में अपने पति विजय के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी। बाद में इस मामले को पारिवारिक विवादों की सुनवाई के लिए अधिकृत फैमिली कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया,जहाँ तब से नियमित रूप से सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय का यह पहला बड़ा व्यक्तिगत कानूनी मामला माना जा रहा है,जिस पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा हो रही है।
सोमवार को यह मामला न्यायाधीश सुजाता की अदालत में सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रक्रिया संबंधी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल उठाए। न्यायाधीश ने संगीता के वकील से पूछा कि मामले में अभी तक आवश्यक ‘वकालतनामा’ या औपचारिक कानूनी प्राधिकार दस्तावेज क्यों दाखिल नहीं किया गया है। अदालत ने इस प्रक्रिया को पूरा करने पर जोर दिया और संबंधित दस्तावेजों को समय पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
इस मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की माँग से जुड़ा रहा। इससे पहले अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान संगीता की ओर से अदालत में एक याचिका दाखिल की गई थी,जिसमें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति माँगी गई थी। याचिका में कहा गया था कि दोनों पक्ष सार्वजनिक जीवन से जुड़े जाने-माने व्यक्ति हैं और उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति सुरक्षा तथा अन्य प्रशासनिक चुनौतियाँ पैदा कर सकती है।
हालाँकि,अदालत ने इस अनुरोध को तत्काल स्वीकार नहीं किया था। सोमवार की सुनवाई में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। अदालत ने पाया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति माँगने वाली याचिका में दोनों पक्षों के सही और पूर्ण ईमेल पते उपलब्ध नहीं कराए गए थे,जो ऑनलाइन सुनवाई की प्रक्रिया के लिए आवश्यक हैं। इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल उस याचिका को खारिज कर दिया और निर्देश दिया कि पहले दोनों पक्षों के प्रमाणित ईमेल पते अदालत के समक्ष जमा किए जाएँ। इसके बाद ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग संबंधी किसी नए अनुरोध पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी जानने की कोशिश की कि दोनों पक्ष भविष्य में कब उपस्थित हो सकते हैं। इससे पहले अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अदालत को बताया था कि जून महीने में व्यक्तिगत उपस्थिति संभव हो सकती है। इसी आधार पर अदालत ने उस समय अगली सुनवाई 15 जून के लिए निर्धारित की थी,लेकिन अब प्रक्रियागत औपचारिकताओं के पूरा न होने और कुछ अन्य कानूनी पहलुओं के कारण सुनवाई को आगे बढ़ाकर 7 अगस्त कर दिया गया है।
यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं रह गया है,बल्कि मुख्यमंत्री पद पर बैठे एक प्रमुख राजनीतिक नेता से जुड़ा होने के कारण लोगों की विशेष रुचि का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री विजय की प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएँ इस मामले की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। यही कारण है कि अदालत भी मामले को संवेदनशीलता और सावधानी के साथ आगे बढ़ा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय न्यायालयों में ऐसे मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा दी जा सकती है,विशेष रूप से तब जब संबंधित व्यक्ति उच्च संवैधानिक पद पर हो या सुरक्षा संबंधी विशेष परिस्थितियाँ मौजूद हों। हालाँकि,इसके लिए सभी प्रक्रियागत नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सुनवाई की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
विजय ने हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार सँभाला है और उनकी सरकार कई कल्याणकारी योजनाओं तथा प्रशासनिक निर्णयों को लेकर चर्चा में रही है। ऐसे समय में उनके निजी जीवन से जुड़ा यह मामला भी लगातार सुर्खियाँ बटोर रहा है। हालाँकि,अब तक न तो विजय और न ही संगीता ने सार्वजनिक रूप से इस विवाद पर कोई विस्तृत टिप्पणी की है। दोनों पक्षों की ओर से केवल कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही अपनी बात रखी जा रही है।
अदालत द्वारा अगली सुनवाई अगस्त तक स्थगित किए जाने के बाद अब इस मामले में लगभग दो महीने का अंतराल रहेगा। इस दौरान दोनों पक्षों को अदालत द्वारा माँगी गई औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। साथ ही यह भी तय हो सकता है कि भविष्य की सुनवाई व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ होगी या फिर तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।
फिलहाल अदालत के ताजा आदेश ने इस बहुचर्चित मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। 7 अगस्त की अगली सुनवाई को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है,क्योंकि उसी दिन यह स्पष्ट हो सकता है कि मुख्यमंत्री विजय और संगीता अदालत के सामने किस रूप में अपनी बात रखेंगे और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी। तब तक यह मामला तमिलनाडु की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रहने की संभावना है।
