दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे के जवाब पर भड़के सतीश सालियान के वकील (तस्वीर क्रेडिट@yati_Official1)

दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे के जवाब पर भड़के सतीश सालियान के वकील,बोले- कई सवालों का अब भी जवाब नहीं

मुंबई,24 सितंबर (युआईटीवी)- दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में सतीश सालियान और शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे के बीच कानूनी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सतीश सालियान की ओर से भेजे गए मानहानि के कानूनी नोटिस पर आदित्य ठाकरे की तरफ से दिए गए जवाब को उनके वकील नीलेश ओझा ने खारिज कर दिया है। ओझा ने ठाकरे के जवाब को भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि इसमें उनके द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि जवाब में ठोस तथ्यों के बजाय शब्दों के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।

सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा के मुताबिक,इस पूरे विवाद में पहले भी कानूनी नोटिस भेजा गया था,लेकिन उस समय उसकी ओर से अपेक्षित जवाब नहीं दिया गया। अब दूसरे नोटिस के जवाब में आदित्य ठाकरे ने कहा है कि उनका उद्देश्य सतीश सालियान को बदनाम करना नहीं था। ठाकरे की ओर से यह भी कहा गया कि उन्होंने दिशा सालियान को व्यक्तिगत रूप से नहीं जाना था और उनकी सोशल मीडिया पोस्ट उन लोगों के संदर्भ में थीं, जिन्हें वह इस मामले को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने वाला मानते हैं।

ओझा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने बचाव का अधिकार है,लेकिन जब गंभीर आरोपों और सार्वजनिक बयानों का मामला हो तो अपने पक्ष में ठोस तथ्य और प्रमाण भी सामने रखने चाहिए। उनके अनुसार,आदित्य ठाकरे के जवाब में उन सवालों का समाधान नहीं किया गया,जिन्हें सतीश सालियान की ओर से लगातार उठाया जाता रहा है। उनका दावा है कि जवाब में मूल मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी देने के बजाय कानूनी भाषा और तर्कों का सहारा लिया गया है।

वकील ने यह भी कहा कि आदित्य ठाकरे की ओर से इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताए जाने पर सवाल उठता है। उनके अनुसार,यदि यह मामला केवल राजनीतिक उद्देश्य से उठाया गया होता,तो इसकी न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ने की स्थिति अलग होती। ओझा ने दावा किया कि इस संबंध में उच्च न्यायालय में भी आपत्ति उठाई गई थी और अदालत ने उस तर्क को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश में पुलिस की जाँच और मामले से जुड़े कई पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

ओझा ने कहा कि सतीश सालियान की ओर से अदालत में रखे गए विभिन्न आधारों में पुलिस की जाँच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे। उनका दावा है कि अदालत के आदेश में जाँच से जुड़े कई पहलुओं को गंभीरता से देखा गया और इसी के बाद आगे की कार्रवाई का रास्ता खुला। हालाँकि,इन आरोपों और दावों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।

इस विवाद में एक और बड़ा मुद्दा उस दिन की मोबाइल टावर लोकेशन को लेकर है। नीलेश ओझा ने सवाल उठाया कि आदित्य ठाकरे अब तक उस समय की अपनी मोबाइल लोकेशन को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि सतीश सालियान की ओर से यह सवाल शुरुआत से ही उठाया जाता रहा है। ओझा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर सार्वजनिक चर्चा हो रही है,तो उस दिन उसकी मौजूदगी और गतिविधियों से जुड़े तथ्य जाँच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आदित्य ठाकरे सार्वजनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं और उनके साथ सरकारी सुरक्षा व्यवस्था भी रहती है। ऐसे में उनके अनुसार,उस अवधि की आवाजाही और सुरक्षा से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद होने चाहिए। ओझा ने माँग की कि यदि ठाकरे इस मामले में अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को गलत मानते हैं,तो उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए उपलब्ध रिकॉर्ड सामने रखने चाहिए।

वकील ने इस मामले में ड्रग्स कारोबार से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सतीश सालियान की ओर से वर्ष 2025 में भेजे गए कानूनी नोटिस में भी इस मुद्दे का उल्लेख किया गया था। ओझा ने कहा कि उनके अनुसार नारकोटिक्स से जुड़े एक मामले में कुछ आरोप सामने आए थे और इसी आधार पर उन्होंने आदित्य ठाकरे से स्पष्टीकरण माँगा था। हालाँकि,ठाकरे की ओर से दिए गए जवाब में इस मुद्दे पर स्पष्ट उत्तर नहीं होने का दावा करते हुए ओझा ने सवाल उठाया कि इस पहलू को नजरअंदाज क्यों किया गया।

ओझा ने कहा कि सतीश सालियान की ओर से उठाए गए सवालों का मकसद किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान चलाना नहीं है,बल्कि उन बिंदुओं पर जवाब माँगना है,जिन्हें परिवार लंबे समय से जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानता रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी आरोप का कोई आधार नहीं है,तो संबंधित व्यक्ति तथ्यों के साथ उसे खारिज कर सकता है,लेकिन केवल आरोपों को राजनीतिक साजिश या बदनाम करने की कोशिश बताने से उठे सवाल खत्म नहीं हो जाते।

इस बीच,दिशा सालियान मामले में कानूनी विवाद का दायरा लगातार बढ़ा है। सतीश सालियान ने हाल में आदित्य ठाकरे के खिलाफ 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस की कार्रवाई की थी और सार्वजनिक माफी की माँग की थी। नोटिस में सोशल मीडिया पर किए गए कथित बयानों को लेकर आपत्ति जताई गई थी।

दूसरी ओर,आदित्य ठाकरे की ओर से दिशा सालियान से किसी तरह का व्यक्तिगत संबंध होने से इनकार किया गया है। उनकी ओर से यह भी कहा गया है कि उनके खिलाफ चलाया जा रहा अभियान राजनीतिक और तथ्यहीन दावों पर आधारित है। इसलिए इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और इन पर अंतिम निष्कर्ष जाँच तथा अदालत की प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा।

नीलेश ओझा ने कहा कि सतीश सालियान की ओर से जिन सवालों को उठाया गया है, उनका जवाब स्पष्ट और तथ्यात्मक तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से मोबाइल टावर लोकेशन,कथित ड्रग्स कारोबार से जुड़े आरोप और मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताने के दावे पर स्पष्टीकरण की माँग की है। उनके अनुसार,जब मामला न्यायिक जाँच के दायरे में है,तो सार्वजनिक रूप से लगाए जा रहे आरोपों और उनके जवाबों में तथ्यात्मक स्पष्टता जरूरी है।

फिलहाल दिशा सालियान की मौत से जुड़ा मामला जाँच और कानूनी प्रक्रिया के बीच है। ऐसे में सामने आ रहे आरोपों,प्रत्यारोपों और कानूनी नोटिसों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जाँच एजेंसियाँ किन तथ्यों की पुष्टि करती हैं और अदालत के सामने आगे क्या सामग्री रखी जाती है। जब तक संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से निष्कर्ष सामने नहीं आता,तब तक किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।