अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा—‘ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया’, बातचीत के लिए 10 दिन का अल्टीमेटम

वॉशिंगटन,28 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और विवादास्पद दावा करते हुए कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य रूप से “पूरी तरह युद्ध जीत लिया” है। उन्होंने कहा कि तेहरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाया गया है और उसका अधिकांश सैन्य ढाँचा अब प्रभावहीन हो चुका है। ट्रंप ने यह बयान फॉक्स न्यूज के लोकप्रिय कार्यक्रम “द फाइव” में फोन पर दिए गए इंटरव्यू के दौरान दिया,जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है।

अपने इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ने ईरान की युद्ध लड़ने की क्षमता को लगभग खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, “हमने पहले ही युद्ध जीत लिया है। सैन्य दृष्टि से हमने पूरी तरह युद्ध जीत लिया है।” ट्रंप के इस बयान ने न केवल अमेरिका की सैन्य रणनीति पर सवाल उठाए हैं,बल्कि मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को और बढ़ाने का काम भी किया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “आप किसी पागल व्यक्ति या पागल विचारधारा को परमाणु हथियार नहीं दे सकते।” उनके अनुसार,ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएँ न केवल क्षेत्रीय,बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी खतरा थीं और इसी कारण अमेरिका को हस्तक्षेप करना पड़ा।

ट्रंप ने अमेरिकी हमलों के पैमाने का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि ईरान के सैन्य ढाँचे को व्यापक नुकसान पहुँचाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी बलों ने ईरान की नौसेना,वायुसेना और मिसाइल सिस्टम को नष्ट कर दिया है। इसके अलावा,मिसाइल लॉन्च सिस्टम और संचार नेटवर्क भी हमलों का प्रमुख निशाना रहे। ट्रंप ने कहा कि इन कार्रवाइयों ने ईरान की सैन्य क्षमता को लगभग पंगु बना दिया है।

इतना ही नहीं,ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के नेतृत्व ढाँचे को भी निशाना बनाया। उन्होंने कहा, “हमने उनके नेताओं को खत्म कर दिया। वे अब अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।” हालाँकि,इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है,लेकिन यह बयान स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी बताया कि उन्होंने ईरान के अनुरोध पर आगे की सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया है। उनके अनुसार,तेहरान ने बातचीत के लिए समय माँगा था,जिसके बाद उन्होंने दस दिनों का अल्टीमेटम दिया। ट्रंप ने कहा, “उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हमें और समय मिल सकता है,इसलिए मैंने उन्हें दस दिन का समय दिया है।” यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत की संभावना बनी हुई है,हालाँकि तनाव अभी भी बरकरार है।

राष्ट्रपति ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस समयसीमा के भीतर कोई समझौता नहीं होता,तो अमेरिका और भी कठोर सैन्य कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने अपेक्षित कदम नहीं उठाए,तो उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि इससे संघर्ष के और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

ट्रंप ने यह भी तर्क दिया कि अमेरिकी हस्तक्षेप केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है,बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा, “हम दुनिया को एक बड़ा लाभ पहुँचा रहे हैं।” उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को वैश्विक सुरक्षा के संदर्भ में सही ठहराने की कोशिश कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप ने घरेलू आलोचनाओं का भी जवाब दिया। उन्होंने विपक्षी नेताओं और आलोचकों की बातों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें अपने राजनीतिक आधार से मजबूत समर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार,अमेरिकी जनता उनके फैसलों का समर्थन कर रही है,खासकर जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति की हो।

हालाँकि,ट्रंप के इन दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान स्थिति को और जटिल बना सकते हैं और कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। वहीं,कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास भी हो सकता है।

मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिरता और संघर्ष का केंद्र रहा है और ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या ईरान ट्रंप के दिए गए दस दिन के अल्टीमेटम के भीतर कोई समझौता करता है या स्थिति और अधिक गंभीर रूप लेती है।

राष्ट्रपति ट्रंप का यह दावा और उनका सख्त रुख यह दर्शाता है कि अमेरिका इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीति हावी होती है या संघर्ष और गहराता है।