एवियन (फ्रांस),18 जून (युआईटीवी)- फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को नई मजबूती देने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ व्यापक बातचीत की। इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते,निवेश सहयोग,आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी,वैश्विक स्थिरता तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ता सहयोग न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बल्कि वैश्विक शांति,स्थिरता और समृद्धि के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार,बैठक के दौरान नेताओं ने इस वर्ष जनवरी में भारत में आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन को याद किया और तब से द्विपक्षीय संबंधों में हुई उल्लेखनीय प्रगति का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने माना कि पिछले कुछ महीनों में आर्थिक,रणनीतिक और राजनीतिक स्तर पर सहयोग को नई गति मिली है। विशेष रूप से मुक्त व्यापार समझौते को लेकर हुई प्रगति को दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक वार्ताओं का सफल समापन इस वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। वर्षों तक चली बातचीत के बाद दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते के मसौदे पर सहमति बनाने में सफल रहे हैं। इस समझौते को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि यह दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक और आर्थिक समझौतों में से एक साबित होगा। यही कारण है कि कई नेताओं और नीति विशेषज्ञों ने इसे “सभी समझौतों की जननी” तक बताया है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी,एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को जल्द से जल्द औपचारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। नेताओं का मानना है कि इस समझौते के लागू होने से व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खुलेंगी। इससे दोनों पक्षों के उद्योगों,कारोबारियों और निवेशकों को व्यापक अवसर मिलेंगे तथा आर्थिक विकास को नई गति प्राप्त होगी।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नेताओं ने मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण के महत्व पर भी चर्चा की। हाल के वर्षों में दुनिया ने विभिन्न संकटों और संघर्षों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधाओं का अनुभव किया है। ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं,जो अधिक सुरक्षित,विश्वसनीय और टिकाऊ हो। मुक्त व्यापार समझौता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों पक्ष लोकतांत्रिक मूल्यों,बहुलवादी समाज और खुली बाजार अर्थव्यवस्था जैसे साझा सिद्धांतों पर आधारित साझेदारी को और मजबूत बनाना चाहते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक समूहों के रूप में भारत और यूरोपीय संघ के संबंध आपसी विश्वास,साझा मूल्यों और भविष्य के प्रति समान दृष्टिकोण पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के नेताओं ने जनवरी 2026 में स्वीकृत संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडा पर भी चर्चा की। इस एजेंडा का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक और परिणामोन्मुख बनाना है। नेताओं ने उम्मीद जताई कि इस रणनीतिक ढाँचे के माध्यम से दोनों पक्षों को दीर्घकालिक और परिवर्तनकारी लाभ प्राप्त होंगे। इसके तहत व्यापार,निवेश,ऊर्जा,डिजिटल तकनीक,हरित विकास,शिक्षा,अनुसंधान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाया जाएगा।
बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा करते हुए नेताओं ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में हुए प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संवाद,कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से ही क्षेत्रीय संकटों का समाधान संभव है। भारत और यूरोपीय संघ दोनों ने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय नेताओं ने एक मजबूत बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि वर्तमान समय में दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है,उनमें जलवायु परिवर्तन,ऊर्जा सुरक्षा,आर्थिक अनिश्चितता, आतंकवाद और क्षेत्रीय संघर्ष प्रमुख हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और मजबूत अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी बातचीत को अत्यंत सकारात्मक और उपयोगी बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर अपने संदेश में कहा कि एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन से मिलना सुखद रहा। उन्होंने याद दिलाया कि इसी वर्ष भारत को गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर दोनों नेताओं का स्वागत करने का सम्मान मिला था। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों के लिए यह एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक समय है क्योंकि दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बातचीत के दौरान आर्थिक जुड़ाव को और गहरा बनाने पर चर्चा हुई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ता सहयोग वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में शांति,स्थिरता और समृद्धि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग नए आयाम हासिल करेगा।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भी बैठक के बाद सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ वर्ष के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे। उनके अनुसार दोनों पक्ष अब अपने वादों और प्रतिबद्धताओं को तेजी से पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निवेश समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रयास तेज किए जाएँगे,ताकि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच निवेश प्रवाह को बढ़ावा मिल सके।
कोस्टा ने सुरक्षा और रक्षा सहयोग को भी भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग को मजबूत करेंगे। समुद्री सुरक्षा,साइबर सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता जैसे विषयों पर भी दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है।
बैठक में भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर यानी आईएमईसी परियोजना पर भी चर्चा हुई। यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत,पश्चिम एशिया और यूरोप को बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से जोड़ने का प्रयास है। इस परियोजना को वैश्विक व्यापार और परिवहन नेटवर्क में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल माना जा रहा है। कोस्टा ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे,ताकि व्यापार,निवेश और संपर्क को नई गति मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमईसी परियोजना भविष्य में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार मार्गों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। यह परियोजना न केवल आर्थिक दृष्टि से,बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे एशिया,मध्य पूर्व और यूरोप के बीच संपर्क मजबूत होगा।
गौरतलब है कि भारत इस वर्ष जी-7 शिखर सम्मेलन में 13वीं बार भाग ले रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच का हिस्सा बने हैं। यह तथ्य स्वयं इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका और महत्व लगातार बढ़ रहा है। भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक नीति निर्माण से जुड़े मुद्दों पर उसकी आवाज को गंभीरता से सुना जा रहा है।
इस वर्ष की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन ने दोनों पक्षों के संबंधों को नई दिशा दी थी। उसी दौरान मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक प्रगति हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी,उर्सुला वॉन डेर लेयेन और अन्य नेताओं ने उस समय इसे एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया था। इसके अलावा कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल हुए थे,जिसने दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया।
एवियन में हुई यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि भारत और यूरोपीय संघ अपने संबंधों को केवल पारंपरिक सहयोग तक सीमित नहीं रखना चाहते,बल्कि उन्हें व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। व्यापार,निवेश,तकनीक,कनेक्टिविटी, सुरक्षा और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच यह साझेदारी न केवल भारत और यूरोप के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
