अमेरिकी फेडरल रिजर्व (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार चौथी बार ब्याज दरें रखीं स्थिर,महँगाई और पश्चिम एशिया संकट के बीच सतर्क रुख अपनाया

वाशिंगटन,18 जून (युआईटीवी)- अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपने नए अध्यक्ष केविन वॉर्श के नेतृत्व में आयोजित पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। दो दिवसीय बैठक के बाद फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने सर्वसम्मति से प्रमुख ब्याज दरों को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने की घोषणा की। यह लगातार चौथी बार है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालाँकि,इस निर्णय के साथ फेड ने यह संकेत भी दिया है कि महँगाई के दबाव और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष के अंत तक ब्याज दरें पहले के अनुमान की तुलना में अधिक स्तर पर बनी रह सकती हैं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े तनाव ने ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में तेजी का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। अमेरिका भी इससे अछूता नहीं है और वहाँ महँगाई एक बार फिर चिंता का विषय बनती दिखाई दे रही है। ऐसे माहौल में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए सतर्कता का संकेत दिया है।

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक के बाद जारी आर्थिक अनुमानों ने यह स्पष्ट कर दिया कि नीति निर्माता अभी भी महँगाई को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। समिति के नए अनुमानों के अनुसार इस वर्ष के अंत तक फेडरल फंड्स रेट 3.8 प्रतिशत तक रह सकती है। यह अनुमान मार्च में जारी 3.4 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। इसका सीधा अर्थ यह है कि फेड को अब लग रहा है कि महँगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को अपेक्षा से अधिक समय तक ऊँचे स्तर पर बनाए रखना पड़ सकता है।

फेड द्वारा जारी किए जाने वाले चर्चित “डॉट प्लॉट” चार्ट ने भी नीति निर्माताओं की सोच को स्पष्ट किया है। इस चार्ट के अनुसार 19 में से 9 सदस्य मानते हैं कि वर्ष के अंत तक उधारी की लागत वर्तमान अनुमान से अधिक रह सकती है। यह संख्या बताती है कि फेड के भीतर भी इस बात को लेकर चिंता मौजूद है कि महँगाई को नियंत्रित करना अभी आसान नहीं होगा। हालाँकि,नए अध्यक्ष केविन वॉर्श ने इस बार अपना व्यक्तिगत डॉट प्लॉट अनुमान प्रस्तुत नहीं किया,लेकिन उनके बयानों से स्पष्ट है कि वह मूल्य स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के पक्षधर हैं।

फेड की बैठक से कुछ दिन पहले जारी अमेरिकी श्रम विभाग के आँकड़ों ने भी केंद्रीय बैंक की चिंता बढ़ाई थी। आँकड़ों के अनुसार मई महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई एक वर्ष पहले की तुलना में 4.2 प्रतिशत बढ़ गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण हुई। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी और इसका सीधा प्रभाव ईंधन तथा ऊर्जा लागत पर पड़ा। महँगाई में यह बढ़ोतरी वर्ष 2023 के बाद सबसे बड़ी सालाना वृद्धि मानी जा रही है।

महँगाई के मुद्दे पर बोलते हुए फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने कहा कि उनके नेतृत्व में केंद्रीय बैंक मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के सभी सदस्य इस बात पर एकमत हैं कि महँगाई को नियंत्रित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। वॉर्श ने स्वीकार किया कि महँगाई पिछले कई वर्षों से केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और इसका असर आम अमेरिकी नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि फेड का दीर्घकालिक लक्ष्य महँगाई को 2 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखना है,लेकिन वास्तविकता यह है कि पिछले पाँच वर्षों से कीमतें इस लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई हैं। लगातार बढ़ती कीमतों ने परिवारों के बजट पर दबाव डाला है और जीवन यापन की लागत को बढ़ाया है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति का यह अर्थ नहीं है कि भविष्य में भी यही स्थिति बनी रहेगी। फेड का मानना है कि उचित नीतिगत कदमों के माध्यम से महँगाई को धीरे-धीरे नियंत्रित किया जा सकता है।

फेडरल रिजर्व ने अपनी नवीनतम आर्थिक रिपोर्ट में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के अनुमान में भी कुछ बदलाव किए हैं। अब केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि इस वर्ष अमेरिका की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 2.2 प्रतिशत रहेगी। मार्च में यह अनुमान 2.4 प्रतिशत था। वृद्धि दर के अनुमान में यह मामूली कमी इस बात का संकेत है कि ऊँची ब्याज दरों और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

हालाँकि,अगले वर्ष के लिए फेड ने अपने अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है। वर्ष 2027 के लिए वृद्धि दर का अनुमान 2.3 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। इसका अर्थ है कि केंद्रीय बैंक को अभी भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती पर भरोसा है,भले ही निकट भविष्य में कुछ चुनौतियां बनी रहें।

महँगाई के एक अन्य महत्वपूर्ण पैमाने व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई के अनुमान को भी फेड ने बढ़ा दिया है। यह सूचकांक अमेरिकी परिवारों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर किए जाने वाले खर्च को मापता है और फेड महँगाई का आकलन करने के लिए इसे विशेष महत्व देता है। नए अनुमान के अनुसार वर्ष के अंत तक पीसीई महँगाई दर 3.6 प्रतिशत रह सकती है,जबकि मार्च में इसका अनुमान 2.7 प्रतिशत था।

यह बदलाव बताता है कि केंद्रीय बैंक अब पहले की तुलना में अधिक महँगाई की संभावना देख रहा है। अगले वर्ष के लिए भी पीसीई महँगाई का अनुमान बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया गया है,जबकि मार्च में यह 2.2 प्रतिशत था। यद्यपि यह अंतर बहुत बड़ा नहीं है,लेकिन यह संकेत देता है कि फेड को अभी भी मूल्य स्थिरता हासिल करने में समय लग सकता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि फेड का यह निर्णय वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है। एक ओर केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया,जिससे निवेशकों को तत्काल राहत मिली है। दूसरी ओर उसने भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए यह संकेत दिया है कि दरों में तेजी से कटौती की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। इससे शेयर बाजार,बॉन्ड बाजार और विदेशी मुद्रा बाजारों में निवेशकों की रणनीति प्रभावित हो सकती है।

फेड के फैसले का असर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। दक्षिण कोरिया और अमेरिका की प्रमुख ब्याज दरों के बीच अधिकतम 1.25 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है। यह अंतर वैश्विक पूँजी प्रवाह,विदेशी निवेश और मुद्रा विनिमय दरों पर प्रभाव डाल सकता है। एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ भी अमेरिकी मौद्रिक नीति पर करीबी नजर रखती हैं क्योंकि फेड के निर्णयों का प्रभाव वैश्विक वित्तीय बाजारों तक पहुँचता है।

केविन वॉर्श के लिए यह बैठक विशेष महत्व रखती थी क्योंकि यह उनके नेतृत्व में आयोजित पहली नीति बैठक थी। उन्होंने 22 मई को फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने जेरोम पॉवेल का स्थान लिया,जिनका कार्यकाल कई महत्वपूर्ण आर्थिक चुनौतियों से भरा रहा। पॉवेल को महँगाई नियंत्रण और ब्याज दर नीति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सार्वजनिक आलोचना का भी सामना करना पड़ा था।

नए अध्यक्ष के रूप में वॉर्श की पहली बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फेड फिलहाल किसी जल्दबाजी में नहीं है। केंद्रीय बैंक आर्थिक आँकड़ों,महँगाई की दिशा और वैश्विक घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव,ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू महँगाई के दबाव को देखते हुए फेड ने संतुलित और सतर्क दृष्टिकोण अपनाया है।

आने वाले महीनों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि महँगाई कितनी तेजी से नियंत्रित होती है और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ किस दिशा में आगे बढ़ती हैं। फिलहाल फेडरल रिजर्व का संदेश स्पष्ट है कि मूल्य स्थिरता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है और जब तक महँगाई पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो जाता,तब तक ब्याज दरों में बड़े बदलाव की संभावना सीमित रह सकती है।