दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल (तस्वीर क्रेडिट@gauravkrdwivedi)

उत्तर कोरिया में ड्रोन भेजने के मामले में पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को 30 साल की जेल,दक्षिण कोरिया की राजनीति में फिर मचा भूचाल

नई दिल्ली,12 जून (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सियोल केंद्रीय जिला न्यायालय ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को उत्तर कोरिया के क्षेत्र में सैन्य ड्रोन भेजने से जुड़े मामले में दोषी ठहराते हुए 30 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय आया है,जब यून सुक योल पहले से ही अन्य गंभीर मामलों में कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अदालत के इस फैसले ने न केवल दक्षिण कोरिया की घरेलू राजनीति में हलचल पैदा कर दी है,बल्कि कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

न्यायालय के प्रवक्ता के अनुसार,अदालत ने 12 जून को सुनाए गए अपने फैसले में माना कि पूर्व राष्ट्रपति ड्रोन अभियान से जुड़े आरोपों के लिए जिम्मेदार हैं। हालाँकि,अदालत की ओर से फैसले के विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए,लेकिन यह स्पष्ट किया गया कि यून सुक योल को 30 साल की कैद की सजा सुनाई गई है। यह सजा उन आरोपों के आधार पर दी गई है जिनमें कहा गया था कि उत्तर कोरिया के क्षेत्र में ड्रोन भेजकर तनाव बढ़ाने और एक प्रकार की युद्ध जैसी स्थिति पैदा करने का प्रयास किया गया।

इस मामले की जड़ें अक्टूबर 2024 में हुई उन कथित ड्रोन उड़ानों से जुड़ी हैं,जिनके बारे में उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि दक्षिण कोरिया द्वारा भेजे गए ड्रोन उसके क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे। प्योंगयांग ने आरोप लगाया था कि इन ड्रोन के माध्यम से प्रचार सामग्री और पत्रक गिराए गए,जिनका उद्देश्य उत्तर कोरिया के खिलाफ मनोवैज्ञानिक अभियान चलाना था। इन आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और अधिक बढ़ गया था।

उत्तर कोरिया ने उस समय इन घटनाओं को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया था और दक्षिण कोरिया को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। वहीं दक्षिण कोरिया के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। विपक्षी दलों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए थे और यह माँग की थी कि पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच कराई जाए।

कई महीनों तक चली जाँच के बाद अप्रैल में विशेष अभियोजन दल ने अपनी रिपोर्ट पेश की। जाँच एजेंसी ने निष्कर्ष निकाला कि ड्रोन अभियान के माध्यम से उत्तर कोरिया के साथ सैन्य तनाव को जानबूझकर बढ़ाने का प्रयास किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि इस तरह की गतिविधियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती थीं और इससे दोनों देशों के बीच किसी बड़े टकराव की आशंका बढ़ सकती थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत से यून सुक योल को 30 वर्ष की जेल की सजा देने की माँग की थी,जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

हालाँकि,पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया और न ही ड्रोन अभियान का आदेश दिया। उनके अनुसार यह मामला राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। यून लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कानून के दायरे में रहते हुए ही सभी फैसले लिए थे।

यून सुक योल के वकीलों ने भी अदालत के फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनके मुवक्किल का ड्रोन अभियान से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। बचाव पक्ष का तर्क है कि ड्रोन संचालन न तो यून के आदेश पर हुआ और न ही उनकी मंजूरी से। वकीलों के अनुसार यह कार्रवाई उत्तर कोरिया की उन गतिविधियों के जवाब में की गई थी,जिनमें महीनों तक सीमा पार दक्षिण कोरिया की ओर कचरे से भरे गुब्बारे भेजे गए थे। उनका कहना है कि इस पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया गया है और इसका मार्शल लॉ या किसी सैन्य साजिश से कोई संबंध नहीं है।

यह फैसला यून सुक योल के खिलाफ चल रहे कई मामलों की श्रृंखला में नवीनतम है। इसी वर्ष फरवरी में दक्षिण कोरिया की एक अन्य अदालत ने उन्हें मार्शल लॉ लागू करने से संबंधित विद्रोह के मामले में दोषी माना था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उस फैसले ने भी देश की राजनीति में व्यापक बहस छेड़ दी थी और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर कई सवाल खड़े किए थे।

यून सुक योल का राजनीतिक पतन तब और तेज हो गया,जब दक्षिण कोरिया के संवैधानिक न्यायालय ने उनके खिलाफ महाभियोग को बरकरार रखा। इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाना पड़ा और देश में समय से पहले चुनाव कराए गए। इन चुनावों में उदारवादी नेता ली जे-म्योंग ने जीत हासिल की और नई सरकार का गठन हुआ। सत्ता परिवर्तन के बाद यून सुक योल के खिलाफ चल रही जांचों को और गति मिली।

विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक पूर्व राष्ट्रपति की कानूनी मुश्किलों तक सीमित नहीं है,बल्कि इससे दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति,उत्तर कोरिया के प्रति रणनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का फैसला यह संदेश देता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उठाए गए कदम भी न्यायिक समीक्षा से परे नहीं हैं।

इस बीच कोरियाई प्रायद्वीप में ड्रोन का मुद्दा लगातार विवाद का विषय बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कई बार ड्रोन गतिविधियों के आरोप लगाए हैं। ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग ने सीमा सुरक्षा और निगरानी से जुड़े नए सवाल पैदा किए हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास और गहरा होता जा रहा है।

इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति ली जे-म्योंग ने भी एक जाँच रिपोर्ट के बाद खेद व्यक्त किया था। उस जाँच में निष्कर्ष निकाला गया था कि सरकारी अधिकारियों ने जनवरी में उत्तर कोरिया के क्षेत्र में ड्रोन तैनात किए थे। ली जे-म्योंग ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा था कि ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकती हैं और संवाद की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

राष्ट्रपति के इस बयान पर उत्तर कोरिया की ओर से भी प्रतिक्रिया आई थी। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने ली जे-म्योंग के बयान को एक समझदारी भरा कदम बताया था। हालाँकि,इसके बावजूद दोनों देशों के संबंधों में कोई ठोस सुधार नहीं हो सका। प्योंगयांग लगातार दक्षिण कोरिया की आलोचना करता रहा है और सीमा पर तनाव भी बना हुआ है।

फिलहाल यून सुक योल हिरासत में हैं और उन्हें अदालत के ताजा फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार प्राप्त है। उनके वकीलों ने संकेत दिए हैं कि वे उच्च अदालत में फैसले को चुनौती देंगे। ऐसे में यह कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। आने वाले महीनों में इस मामले की सुनवाई और राजनीतिक प्रभाव दक्षिण कोरिया की राजनीति तथा उत्तर-दक्षिण कोरिया संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अदालत के फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि दक्षिण कोरिया में सत्ता के सर्वोच्च पद पर बैठे नेताओं को भी कानून के दायरे में जवाबदेह माना जाता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अपील प्रक्रिया में क्या नया मोड़ आता है और क्या यह मामला कोरियाई प्रायद्वीप की राजनीति और सुरक्षा परिदृश्य को और अधिक प्रभावित करता है।