होर्मुज जलडमरूमध्य (तस्वीर क्रेडिट@TheLallantop)

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा फैसला,60 दिनों तक जहाजों से नहीं लिया जाएगा शुल्क

तेहरान,19 जून (युआईटीवी)- ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा कदम उठाया है। देश की सर्वोच्च सुरक्षा संस्था सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने घोषणा की है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के आवागमन संबंधी अनुरोधों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है,जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं,जिसे दोनों देशों के संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

ईरानी मीडिया में जारी आधिकारिक बयान के अनुसार,होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतर्राष्ट्रीय जहाजों के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री व्यापार को सुचारु बनाना,क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना और हाल ही में हुए समझौते के व्यावहारिक परिणामों को सामने लाना है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यह कदम दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन की भावना के अनुरूप है।

यह घोषणा उस समय सामने आई,जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। लंबे समय से तनावपूर्ण रहे संबंधों के बीच यह समझौता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अनुसार समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस अवधि के दौरान जहाजों के आवागमन से संबंधित सभी खर्चों का वहन ईरान सरकार स्वयं करेगी। यह निर्णय वैश्विक शिपिंग कंपनियों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार जगत के लिए राहत भरा माना जा रहा है,क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है।

दुनिया के ऊर्जा व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों से निकलने वाला कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी जलमार्ग के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की नीति परिवर्तन का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर पड़ना स्वाभाविक माना जाता है।

ईरानी अधिकारियों ने बताया है कि इस मार्ग का उपयोग करने वाले सभी जहाजों को अपने आवागमन संबंधी अनुरोध पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी को भेजने होंगे। यही संस्था यातायात के प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी सँभालेगी। प्रशासन का कहना है कि इससे जहाजों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाई जा सकेगी।

सुरक्षा को लेकर भी ईरान ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित करने के लिए जहाजों को निर्धारित मार्गों का पालन करना होगा। उन्हें तय समय-सारिणी के अनुसार ही आवाजाही करनी होगी,ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना या अव्यवस्था की संभावना को कम किया जा सके।

बयान में यह भी स्वीकार किया गया है कि जलमार्ग के कुछ हिस्सों में सुरक्षा संबंधी जोखिम मौजूद हैं। ऐसे में नियंत्रित और निगरानी वाली व्यवस्था के माध्यम से यातायात को संचालित किया जाएगा। ईरान का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाना नहीं,बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित समुद्री संचालन सुनिश्चित करना है।

ईरानी अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश और कार्यान्वयन की प्रक्रिया जारी करेगी।

दूसरी ओर अमेरिका ने भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि आने वाले 60 दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। उनके अनुसार यही अवधि यह तय करेगी कि हालिया समझौता कितनी सफलता के साथ आगे बढ़ पाता है और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

वेंस ने स्पष्ट किया कि ईरान को मिलने वाले आर्थिक लाभ केवल राजनीतिक घोषणाओं या आश्वासनों के आधार पर नहीं होंगे। इसके लिए जमीन पर ठोस और सत्यापित कदमों की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि समझौते का वास्तविक मूल्यांकन उसके क्रियान्वयन से होगा और दोनों पक्षों को अपने दायित्वों का पालन करना होगा।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वाशिंगटन की कोशिश इस समझौते को आगे बढ़ाकर एक स्थायी शांति समझौते में बदलने की है। उनके अनुसार भविष्य की बातचीत में केवल आर्थिक और समुद्री व्यापार संबंधी मुद्दे ही नहीं,बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों जैसे संवेदनशील विषय भी शामिल हो सकते हैं।

हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा अविश्वास इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। दशकों से चले आ रहे राजनीतिक मतभेदों और तनावपूर्ण संबंधों के कारण किसी भी समझौते को लागू करना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद अमेरिका इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

वेंस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 60 दिनों की अवधि आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है और अब दोनों पक्षों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले सप्ताह यह निर्धारित करेंगे कि हालिया समझौता केवल एक अस्थायी व्यवस्था साबित होता है या फिर यह व्यापक सहयोग और स्थायी शांति की दिशा में पहला बड़ा कदम बनता है।

अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का यह निर्णय वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि अगले 60 दिनों के दौरान समझौते का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन होता है,तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।

फिलहाल दुनिया की निगाहें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हुई हैं। दोनों देशों के बीच शुरू हुई यह नई प्रक्रिया भविष्य में किस दिशा में जाएगी,इसका जवाब आने वाले दो महीनों में मिलने की उम्मीद है। इतना जरूर है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लिया गया यह फैसला मध्य पूर्व की राजनीति,वैश्विक व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है।