स्विट्जरलैंड में देर रात तक चली अमेरिका-ईरान वार्ता (तस्वीर क्रेडिट@MofaQatar_EN)

स्विट्जरलैंड में देर रात तक चली अमेरिका-ईरान वार्ता,परमाणु कार्यक्रम,होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान पर बनी सहमति की उम्मीद

बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड),22 जून (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों को एक नई दिशा देते हुए स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच रविवार देर रात तक महत्वपूर्ण वार्ता चलती रही। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई जटिल मुद्दों के बीच हुई इस बैठक को पश्चिम एशिया में स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

स्विट्जरलैंड के खूबसूरत लेक ल्यूसर्न के निकट स्थित बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और ईरानी अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार,वार्ता का मुख्य केंद्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा,लेबनान की स्थिति तथा क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे रहे।

अमेरिकी प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार,बातचीत अपेक्षा से अधिक सकारात्मक रही और दोनों पक्षों ने विभिन्न विषयों पर अपनी चिंताओं तथा प्रस्तावों को खुलकर साझा किया। अमेरिकी अधिकारियों ने उन अटकलों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया,जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता बीच में छोड़कर चला गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ईरानी प्रतिनिधि लगातार बातचीत में शामिल रहे और देर रात तक बैठकें जारी रहीं।

बैठक के शुरुआती चरण के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मीडिया से बातचीत में आशावाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पहले ही दिन दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है और उन्हें उम्मीद है कि आगे की चर्चा से और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। वेंस के अनुसार,कई ऐसे मुद्दे हैं,जिन पर दोनों देशों के विचार अलग-अलग रहे हैं, लेकिन संवाद के जरिए समाधान खोजने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के एक वरिष्ठ राजनयिक ने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रविवार सुबह स्विट्जरलैंड पहुँचे और उसके बाद से लगातार बैठकों का दौर चलता रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टीम ने ईरानी प्रतिनिधियों के साथ कई घंटों तक चर्चा की और दोनों पक्षों ने विभिन्न विषयों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया। अधिकारी ने यह भी कहा कि बातचीत के दौरान किसी भी पक्ष ने वार्ता छोड़ने की इच्छा नहीं जताई और सभी प्रतिनिधि समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दिए।

वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित रखे और ऐसे सभी कदमों से बचे जो परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में माने जा सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस विषय पर हुई चर्चा रचनात्मक रही और कई तकनीकी मुद्दों पर आगे की बातचीत के लिए आधार तैयार हुआ है।

वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक के अनुसार, दोनों पक्षों ने परमाणु समझौते से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण तत्वों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान कई ऐसे बिंदुओं पर सहमति बनी है,जिन्हें आगे की तकनीकी बैठकों में विस्तार से अंतिम रूप दिया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है,लेकिन वर्तमान संवाद भविष्य के किसी व्यापक समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हो सकता है।

परमाणु कार्यक्रम के अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी मार्ग से होकर गुजरता है। हाल के महीनों में ईरान की ओर से आए कुछ बयानों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों ने इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वार्ता के दौरान इन सभी भ्रमों और चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया गया।

अमेरिकी प्रतिनिधियों के अनुसार,दोनों पक्षों ने इस बात पर विचार किया कि जलडमरूमध्य को हर परिस्थिति में खुला रखा जाए और किसी भी प्रकार के टकराव या गलतफहमी से बचने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे का समाधान अत्यंत आवश्यक है।

लेबनान की स्थिति भी वार्ता के केंद्र में रही। हाल के महीनों में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़े तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। दक्षिणी लेबनान में लगातार हो रही झड़पों और सैन्य गतिविधियों ने संघर्षविराम को कमजोर किया है,जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि दोनों पक्षों ने लेबनान में शांति बहाल करने और संघर्षविराम को प्रभावी ढंग से लागू करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि लेबनान में स्थिरता केवल उस देश के लिए ही नहीं,बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। अधिकारियों ने कहा कि बातचीत के दौरान ऐसे तंत्र विकसित करने पर विचार किया गया,जो संघर्ष को दोबारा भड़कने से रोक सकें और सभी पक्षों को शांति प्रक्रिया का पालन करने के लिए प्रेरित करें।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी लेबनान को लेकर आशावादी रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भले ही कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं,लेकिन सभी पक्ष क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करने की आवश्यकता को समझते हैं। वेंस के अनुसार,समाधान तक पहुँचने के लिए अभी काफी काम बाकी है,लेकिन बातचीत की दिशा उत्साहजनक है और सभी पक्ष संवाद जारी रखने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में हो रही यह वार्ता केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। यदि दोनों देशों के बीच किसी व्यापक समझौते की दिशा में प्रगति होती है,तो इससे क्षेत्रीय तनाव कम करने और लंबे समय से चले आ रहे कई विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल आगे की तकनीकी और राजनीतिक स्तर की बैठकों की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि रविवार को हुई चर्चा को भविष्य की वार्ताओं के लिए आधार बनाया जाएगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्विट्जरलैंड में शुरू हुई यह कूटनीतिक पहल किस हद तक ठोस परिणामों में बदल पाती है,लेकिन अभी के संकेत बताते हैं कि दोनों पक्ष संवाद के रास्ते को खुला रखना चाहते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए साझा समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।