नई दिल्ली,10 जून (युआईटीवी)- भारतीय राजनीति में बुधवार का दिन एक ऐतिहासिक पड़ाव के रूप में दर्ज हो गया,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए। केंद्र सरकार के प्रमुख के रूप में 12 वर्ष पूरे करने के साथ ही उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया,जो दशकों से कायम था। यह उपलब्धि केवल राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं,बल्कि लोकतांत्रिक जनादेश और शासन की निरंतरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में पहली बार देश की बागडोर सँभाली थी। इसके बाद 2019 में उन्होंने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की और 2024 में तीसरी बार लगातार जनादेश हासिल कर इतिहास रच दिया। इस तरह उन्होंने लगातार तीन आम चुनावों में जनता का भरोसा जीतते हुए भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। बुधवार को उनके कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे हो गए,जिसके साथ ही उन्होंने चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल की अवधि को पार कर लिया।
इस तुलना के लिए नेहरू के 1952 से शुरू हुए कार्यकाल को आधार माना जाता है,क्योंकि स्वतंत्रता के बाद 1947 से 1952 तक वे अंतरिम सरकार और बाद में संक्रमणकालीन व्यवस्था के प्रमुख के रूप में कार्य कर रहे थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव संपन्न होने के बाद वे लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के प्रधानमंत्री बने थे। उसी अवधि की गणना के आधार पर नरेंद्र मोदी ने अब यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।
हालाँकि,पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कुल मिलाकर 14 वर्षों से अधिक समय तक प्रधानमंत्री रहीं,लेकिन उनका कार्यकाल लगातार नहीं था। उनके शासन में एक अंतराल आया था, जिसके कारण लगातार सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड अब नरेंद्र मोदी के नाम दर्ज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र में स्थिर नेतृत्व और लगातार जनसमर्थन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में कई बड़े बुनियादी ढाँचा और राष्ट्र-निर्माण परियोजनाओं को गति मिली है। इस अवधि में नए संसद भवन का निर्माण, सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना,कर्तव्य पथ का विकास,वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण,स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का नौसेना में शामिल होना,कश्मीर रेल लिंक परियोजना,नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा,नमो भारत क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनीं।
सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं ने न केवल देश के बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया है,बल्कि आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संपर्क को भी नई गति प्रदान की है। पिछले एक दशक में रेलवे,सड़क,हवाई अड्डों,बंदरगाहों और डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। इसी कारण सरकार अपने कार्यकाल को विकास और परिवर्तन के दौर के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस उपलब्धि के साथ ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने भी इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर के रूप में देखा है। इसी क्रम में बुधवार को राजधानी में गठबंधन की एक अहम बैठक आयोजित की जा रही है। भारत मंडपम में होने वाली इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य केंद्र में गठबंधन सरकार के 12 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने के साथ-साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा करना भी है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में गठबंधन की ओर से एक विशेष प्रस्ताव भी पारित किया जा सकता है,जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी जाएगी। यह प्रस्ताव उनके नेतृत्व में बीते वर्षों में किए गए कार्यों और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका को रेखांकित कर सकता है।
बैठक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित सभी 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री भी शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा गठबंधन की विभिन्न सहयोगी पार्टियों के नेता भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। इस व्यापक भागीदारी को आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बैठक केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं होगी,बल्कि भविष्य के लिए दिशा तय करने का भी मंच बनेगी। आने वाले वर्षों में सरकार की प्राथमिकताओं,विकास योजनाओं,आर्थिक सुधारों और राजनीतिक रणनीतियों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही आगामी चुनावी चुनौतियों और गठबंधन को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार किया जा सकता है।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,गृह मंत्री अमित शाह,भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तथा कई केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। माना जा रहा है कि सरकार अपने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने और आगामी वर्षों के लिए विकास के एजेंडे को स्पष्ट करने का प्रयास करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उपस्थिति मजबूत की है। विदेश नीति,आर्थिक कूटनीति,डिजिटल परिवर्तन,विनिर्माण,ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका को सरकार अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करती है। यही कारण है कि लगातार तीन बार जनादेश प्राप्त करने वाले प्रधानमंत्री के रूप में उनकी राजनीतिक यात्रा को आधुनिक भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना केवल राजनीतिक रणनीति का परिणाम नहीं होता,बल्कि इसके पीछे व्यापक जनसमर्थन,संगठनात्मक क्षमता और शासन के प्रति जनता के विश्वास की भी बड़ी भूमिका होती है। नरेंद्र मोदी का यह नया रिकॉर्ड इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
बुधवार को हासिल हुई यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय राजनीति में एक नए मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार आने वाले वर्षों में किन नई प्राथमिकताओं और योजनाओं के साथ आगे बढ़ते हैं। फिलहाल इतना तय है कि लगातार सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीतिक इतिहास में अपना नाम एक विशेष स्थान पर दर्ज करा लिया है।
