नई दिल्ली,14 मई (युआईटीवी)- दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार बम धमाके की जाँच में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस मामले में दायर की गई विस्तृत चार्जशीट ने यह संकेत दिया है कि आरोपियों का उद्देश्य केवल राजधानी में एक आतंकी हमला करना नहीं था,बल्कि पूरे देश में एक संगठित जिहादी नेटवर्क खड़ा कर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देना था। जाँच एजेंसी के अनुसार इस पूरी साजिश को ‘ऑपरेशन हेवनली हिंद’ नाम दिया गया था,जिसके तहत कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देकर देश में अस्थिरता फैलाने की तैयारी की जा रही थी।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने गुरुवार को दिल्ली की विशेष अदालत में इस मामले से जुड़ी 7,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की। यह चार्जशीट पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत में पेश की गई। इसमें कुल 10 आरोपियों को नामजद किया गया है। मुख्य आरोपी उमर उन नबी की मौत धमाके के दौरान ही हो गई थी,जबकि अन्य नौ आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद,साजिश,विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
एनआईए की जाँच के अनुसार सभी आरोपी आतंकी संगठन ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ से जुड़े हुए थे। एजेंसी ने दावा किया है कि यह संगठन दरअसल अल-कायदा इंडियन सबकॉन्टिनेंट की ही एक शाखा के रूप में काम कर रहा था। गृह मंत्रालय पहले ही जून 2018 में इस संगठन और उससे जुड़े सभी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका था। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने पुराने नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करते हुए इसे नए नाम ‘एजीयूएच-अंतरिम’ के तहत संचालित करना शुरू किया था।
चार्जशीट में कहा गया है कि वर्ष 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक इस पूरे मॉड्यूल की शुरुआत का अहम बिंदु थी। एनआईए के अनुसार कुछ आरोपी पहले तुर्की के रास्ते अफगानिस्तान भागने की कोशिश कर चुके थे,लेकिन असफल रहने के बाद उन्होंने भारत के भीतर ही अपने नेटवर्क को मजबूत करने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने ‘ऑपरेशन हेवनली हिंद’ नामक योजना शुरू की,जिसका मकसद भारत सरकार को हिंसक तरीकों से अस्थिर करना और देश में शरिया कानून लागू करने की दिशा में काम करना था।
जाँच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आरोपियों ने बड़ी साजिश के तहत युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने का अभियान चलाया। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म,एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और निजी बैठकों के जरिए नए लोगों की भर्ती की जाती थी। आरोपियों ने कथित तौर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने नेटवर्क का विस्तार करने की भी योजना बनाई थी।
एनआईए के अनुसार इस मॉड्यूल की सबसे खतरनाक बात यह थी कि इसके कुछ सदस्य पेशे से डॉक्टर थे। जाँच एजेंसी का दावा है कि पढ़े-लिखे और पेशेवर पृष्ठभूमि वाले इन लोगों ने वैज्ञानिक जानकारी और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर विस्फोटक तैयार करने और हमलों की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी ने कहा कि आरोपियों ने बाजार में आसानी से उपलब्ध रसायनों का इस्तेमाल कर ‘ट्राईएसीटोन ट्राईपरऑक्साइड’ यानी टीएटीपी विस्फोटक तैयार किया,जिसका इस्तेमाल लाल किला धमाके में किया गया था।
टीएटीपी एक बेहद खतरनाक और संवेदनशील विस्फोटक माना जाता है,जिसे कई अंतर्राष्ट्रीय आतंकी हमलों में भी इस्तेमाल किया जा चुका है। जाँच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने प्रयोगशाला में इस्तेमाल होने वाले विशेष उपकरणों की खरीदारी भी की थी। इनमें इलेक्ट्रिक सर्किट,एमएमओ एनोड,स्विच और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल थे। एनआईए का कहना है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल आईईडी बनाने और विस्फोटक परीक्षण के लिए किया गया।
चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि आरोपियों ने कई तरह के आईईडी तैयार किए और उनके परीक्षण भी किए। इसके अलावा वे ड्रोन और रॉकेट के जरिए विस्फोटक हमले करने की योजना पर भी काम कर रहे थे। जाँच एजेंसी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन आधारित हमलों के प्रयोग किए गए थे। आरोपियों ने कथित तौर पर रॉकेट और ड्रोन पर आईईडी लगाकर हमले करने के तरीके विकसित करने की कोशिश की थी।
एनआईए ने बताया कि जाँच के दौरान आरोपियों के पास से अवैध हथियारों का बड़ा जखीरा भी बरामद किया गया। इनमें एके-47 राइफल,क्रिनकोव राइफल और देसी पिस्तौल शामिल थीं। एजेंसी का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल संभावित आतंकी हमलों और सुरक्षा बलों पर हमले की योजना में किया जाना था।
जांच के दौरान दिल्ली,हरियाणा और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में व्यापक छापेमारी की गई। एनआईए ने तकनीकी साक्ष्यों,डिजिटल डाटा,डीएनए जाँच और फिंगरप्रिंटिंग के जरिए मुख्य आरोपी उमर उन नबी की पहचान की पुष्टि की। जाँच एजेंसी ने धमाके वाली जगह के अलावा फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी और जम्मू-कश्मीर में मौजूद कई संदिग्ध ठिकानों की भी जाँच की।
एनआईए का कहना है कि इस मॉड्यूल की गतिविधियां केवल दिल्ली या जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं थीं। आरोपियों की योजना देश के अन्य हिस्सों में भी अपने नेटवर्क का विस्तार करने की थी। हालाँकि,एजेंसी का दावा है कि समय रहते इस नेटवर्क का भंडाफोड़ होने से बड़ी आतंकी साजिश नाकाम हो गई।
अब तक इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालाँकि,जाँच एजेंसी का मानना है कि इस मॉड्यूल से जुड़े कुछ अन्य लोग अभी भी फरार हैं। एनआईए की टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। एजेंसी ने अदालत को बताया कि जाँच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और आगे भी नए खुलासे हो सकते हैं।
इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि जाँच में सामने आया है कि कट्टरपंथी संगठन अब तकनीकी संसाधनों,पेशेवर लोगों और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर अपने नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ड्रोन,रॉकेट और आईईडी आधारित हमलों की तैयारी से यह भी संकेत मिलता है कि आतंकी संगठन पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नई रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मॉड्यूल केवल सुरक्षा चुनौती ही नहीं,बल्कि वैचारिक चुनौती भी बनते जा रहे हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार तेजी से हो रहा है,जिससे युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए केवल आतंकी गतिविधियों को रोकना ही नहीं,बल्कि कट्टरपंथी नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
दिल्ली में हुए इस धमाके और उसके बाद सामने आए खुलासों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के भीतर सक्रिय आतंकी मॉड्यूल अब अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम होते जा रहे हैं। एनआईए की जाँच फिलहाल जारी है और एजेंसी का कहना है कि आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।
