टेलीग्राम (तस्वीर क्रेडिट@singhkaptan291)

टेलीग्राम पर अस्थायी रोक खत्म,प्ले स्टोर पर लौटा ऐप; एडिट मैसेज फीचर पर 30 जून तक प्रतिबंध

नई दिल्ली,23 जून (युआईटीवी)- मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम मंगलवार को एक बार फिर गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध हो गया। केंद्र सरकार द्वारा नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा को लेकर सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस ऐप पर लगाई गई अस्थायी रोक अब समाप्त हो चुकी है। हालाँकि,प्लेटफॉर्म के एडिट मैसेज फीचर पर 30 जून तक प्रतिबंध जारी रहेगा। दूसरी ओर,खबर लिखे जाने तक यह ऐप एप्पल के ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं हुआ था।

सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के अनुरोध पर 16 जून से 22 जून तक भारत में टेलीग्राम की सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का आदेश जारी किया था। एजेंसी का कहना था कि कुछ संगठित नकल गिरोह इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे थे और 21 जून को आयोजित नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को गुमराह करने तथा उनसे धोखाधड़ी करने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी प्रश्नपत्र,उत्तर कुंजी और परीक्षा से जुड़े भ्रामक दावे तेजी से फैलाए जा रहे थे,जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस खतरे को देखते हुए एहतियातन टेलीग्राम को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया। मंत्रालय का मानना था कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की संगठित नकल या गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है। सरकार ने विशेष रूप से उन समूहों और चैनलों पर चिंता जताई थी, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई उन चीटिंग रैकेट्स द्वारा प्लेटफॉर्म के संगठित इस्तेमाल के जवाब में की गई है,जो दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को धोखा देने की कोशिश कर रहे थे। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी ऐसी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,जो लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करे।

इस मामले ने कानूनी मोड़ भी लिया,जब टेलीग्राम एफजेड एलएलसी ने केंद्र सरकार के ब्लॉकिंग ऑर्डर को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। कंपनी का तर्क था कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना अनुपातहीन कदम है और इससे लाखों वैध उपयोगकर्ताओं को परेशानी हो रही है,लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

जस्टिस तेजस करिया की एकल पीठ ने कहा कि देशव्यापी मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े हालात को देखते हुए सरकार द्वारा 22 जून तक टेलीग्राम को अस्थायी रूप से रोकना उचित था। अदालत ने यह भी माना कि प्लेटफॉर्म के मैसेज एडिटिंग फीचर को 30 जून तक बंद रखने का निर्णय भी परिस्थितियों के अनुरूप है। अदालत के अनुसार,जब परीक्षा की पारदर्शिता और सार्वजनिक हित दांव पर हों,तब सरकार को आवश्यक एहतियाती कदम उठाने का अधिकार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एडिट मैसेज फीचर पर जारी प्रतिबंध का उद्देश्य उन संदेशों में फेरबदल को रोकना है,जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर गलत सूचना फैलाने या परीक्षा से जुड़े दावों को बाद में बदलने के लिए किया जा सकता है। जाँच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में संदेशों का मूल स्वरूप महत्वपूर्ण होता है,इसलिए सरकार ने फिलहाल इस फीचर को सीमित रखने का फैसला किया है।

टेलीग्राम की सेवाएँ बहाल होने के बाद उपयोगकर्ता फिर से ऐप डाउनलोड और इस्तेमाल कर सकेंगे। हालाँकि,कई लोगों ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या भविष्य में परीक्षा संबंधी संवेदनशील अवधि के दौरान सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर इसी तरह की अस्थायी पाबंदियाँ लगाई जा सकती हैं। डिजिटल अधिकारों से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को लक्षित कार्रवाई और तकनीकी निगरानी जैसे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए,ताकि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने की जरूरत कम पड़े।

दूसरी ओर,शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक,फर्जी संदेशों और ऑनलाइन ठगी की घटनाएँ बढ़ी हैं,जिससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा प्रभावित हुआ है। ऐसे में यदि किसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल संगठित धोखाधड़ी के लिए हो रहा हो,तो सरकार द्वारा अस्थायी और सीमित अवधि के लिए हस्तक्षेप करना गलत नहीं माना जा सकता।

फिलहाल स्थिति यह है कि गूगल प्ले स्टोर पर टेलीग्राम की वापसी हो चुकी है,लेकिन एडिट मैसेज फीचर पर 30 जून तक रोक बनी रहेगी। एप्पल के ऐप स्टोर पर इसकी उपलब्धता को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार,एनटीए और तकनीकी एजेंसियाँ अब परीक्षा से जुड़ी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं,ताकि भविष्य में किसी भी तरह की नकल या धोखाधड़ी की संभावना को रोका जा सके।

नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा को लेकर उठाए गए इस कदम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी,सरकारी हस्तक्षेप की सीमा और परीक्षाओं की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले दिनों में यह मामला तकनीकी कंपनियों,नियामक संस्थाओं और न्यायपालिका के बीच नीति निर्धारण की एक अहम मिसाल बन सकता है।