धीरज बोम्मादेवरा (तस्वीर क्रेडिट@Anitha_TDP)

धीरज बोम्मादेवरा का स्वर्णिम कमाल,विश्व कप में रचा इतिहास; व्यक्तिगत और मिश्रित टीम में जीते दो-दो गोल्ड

अंताल्या,15 जून (युआईटीवी)- भारतीय तीरंदाजी के लिए तुर्की के अंताल्या से बेहद गर्व करने वाली खबर सामने आई है। देश के युवा तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने आर्चरी विश्व कप स्टेज-3 में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने न केवल पुरुषों की व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया,बल्कि मिश्रित टीम प्रतियोगिता में भी स्वर्ण जीतकर गोल्डन डबल पूरा कर लिया। इस शानदार उपलब्धि ने उन्हें भारतीय तीरंदाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों की सूची में शामिल कर दिया है।

24 वर्षीय धीरज बोम्मादेवरा ने पुरुषों के व्यक्तिगत रिकर्व फाइनल में दक्षिण कोरिया के स्टार तीरंदाज और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ली वू-सियोक को 7-3 से हराकर अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब जीता। फाइनल मुकाबले में धीरज ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया और अपने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रिकर्व तीरंदाजों में गिने जाने वाले ली वू-सियोक के खिलाफ यह जीत भारतीय खिलाड़ी की प्रतिभा और मानसिक मजबूती का शानदार उदाहरण मानी जा रही है।

यह धीरज का विश्व कप प्रतियोगिता में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है। इससे पहले वह विश्व कप के विभिन्न चरणों में तीन बार कांस्य पदक जीत चुके थे,लेकिन स्वर्ण पदक उनसे दूर रहा था। अंताल्या में उन्होंने उस कमी को भी पूरा कर लिया और अपने करियर की सबसे यादगार जीत दर्ज की। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारत के लिए पुरुषों की व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में पाँच साल से चला आ रहा स्वर्ण पदक का इंतजार भी समाप्त कर दिया।

धीरज से पहले वर्ष 2021 में अतनु दास ने इस स्पर्धा में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था। इसके अलावा जयंत तालुकदार भी विश्व कप स्तर पर व्यक्तिगत रिकर्व खिताब जीतने वाले भारतीय तीरंदाज रह चुके हैं। अब धीरज बोम्मादेवरा का नाम भी इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हो गया है।

हालाँकि,स्वर्ण पदक तक पहुँचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। सेमीफाइनल मुकाबले में उनका सामना जर्मनी के मोरित्ज वीजर से हुआ। मुकाबले के शुरुआती चरण में धीरज 3-1 से पीछे चल रहे थे और ऐसा लग रहा था कि उनके लिए फाइनल में पहुँचना मुश्किल हो जाएगा,लेकिन भारतीय तीरंदाज ने जबरदस्त धैर्य और आत्मविश्वास का परिचय दिया। उन्होंने लगातार शानदार निशाने लगाए और मुकाबले में वापसी करते हुए 6-4 से जीत दर्ज की। इस जीत ने उन्हें स्वर्ण पदक मुकाबले का टिकट दिलाया और यहीं से उनके ऐतिहासिक अभियान की नींव मजबूत हो गई।

फाइनल में पहुँचने के बाद धीरज ने किसी भी तरह का दबाव अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने हर सेट में सटीक निशाने लगाए और दक्षिण कोरिया के अनुभवी खिलाड़ी को लगातार चुनौती देते रहे। अंततः 7-3 की जीत के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। यह जीत केवल एक पदक नहीं थी,बल्कि भारतीय तीरंदाजी की बढ़ती ताकत का भी प्रतीक थी।

व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतने से पहले धीरज ने दिन की शुरुआत भी शानदार अंदाज में की थी। उन्होंने 17 वर्षीय युवा तीरंदाज कुमकुम मोहोद के साथ मिलकर मिश्रित टीम रिकर्व स्पर्धा में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। तीसरी वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने फाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरियाई जोड़ी ओह येजिन और किम जे-डियोक को 5-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया।

दक्षिण कोरिया की टीम को तीरंदाजी की दुनिया में सबसे मजबूत माना जाता है और किम जे-डियोक टोक्यो ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता मिश्रित टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। ऐसे में भारतीय जोड़ी की यह जीत और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। धीरज और कुमकुम ने पूरे मुकाबले के दौरान बेहतरीन तालमेल दिखाया और दबाव की परिस्थितियों में भी सटीक प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की।

इस जीत के साथ धीरज और कुमकुम विश्व कप स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की केवल तीसरी मिश्रित रिकर्व जोड़ी बन गई हैं। इससे पहले दीपिका कुमारी और अतनु दास ने वर्ष 2021 में पेरिस में यह उपलब्धि हासिल की थी। इसके बाद वर्ष 2022 में तरुणदीप राय और रिधि ने अंताल्या में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था। अब धीरज और कुमकुम ने इस गौरवशाली सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

कुमकुम मोहोद के लिए भी यह उपलब्धि बेहद खास रही। युवा भारतीय तीरंदाज का यह लगातार दूसरा विश्व कप स्वर्ण पदक है। कम उम्र में जिस तरह का प्रदर्शन वह कर रही हैं,उससे यह साफ है कि आने वाले वर्षों में वह भारतीय तीरंदाजी की बड़ी उम्मीद बन सकती हैं। धीरज और कुमकुम की जोड़ी ने जिस आत्मविश्वास और निरंतरता के साथ प्रदर्शन किया,उसने भविष्य के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं।

अंताल्या में भारतीय तीरंदाजों का यह प्रदर्शन देश के लिए गर्व का विषय है। धीरज बोम्मादेवरा ने दो स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया है कि भारतीय तीरंदाजी अब विश्व स्तर पर किसी भी बड़ी चुनौती का सामना करने में सक्षम है। व्यक्तिगत और मिश्रित टीम दोनों वर्गों में स्वर्ण जीतकर उन्होंने न केवल अपना नाम रोशन किया,बल्कि भारतीय खेल जगत को भी एक नई उपलब्धि का जश्न मनाने का अवसर दिया है। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी प्रेरित करेगी और भारतीय तीरंदाजी के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करती है।