रोहित शेट्टी (तस्वीर क्रेडिट@askshivanisahu)

रोहित शेट्टी फायरिंग केस में बड़ा खुलासा,हवाला के जरिए पहुँची रकम,बिश्नोई गैंग की साजिश का पर्दाफाश

मुंबई,6 अप्रैल (युआईटीवी)- मुंबई में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जूहू स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है,वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच की जाँच में अब यह स्पष्ट हुआ है कि इस हमले के पीछे एक संगठित आपराधिक नेटवर्क सक्रिय था,जिसने हवाला के जरिए फंडिंग कर पूरी साजिश को अंजाम देने की कोशिश की। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी गोलू पंडित उर्फ प्रदीप शर्मा से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं,जो इस पूरे षड्यंत्र की गहराई को उजागर करती हैं।

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार,इस फायरिंग कांड में शामिल शूटरों की भर्ती करने वाले गोलू पंडित को हवाला नेटवर्क के माध्यम से मोटी रकम दी गई थी। यह रकम अलग-अलग स्थानों—नेपाल,दिल्ली और उत्तर प्रदेश से भेजी गई थी,ताकि जाँच एजेंसियों को इसका सीधा सुराग न मिल सके। जाँच में यह भी सामने आया है कि इस फंडिंग के पीछे बिश्नोई गैंग का हाथ था,जो पिछले कुछ समय से कई हाई-प्रोफाइल मामलों में सक्रिय रहा है।

सूत्रों के मुताबिक,गैंग के मौजूदा ऑपरेटर आरजू बिश्रोई ने अपने नेटवर्क के जरिए यह रकम अलग-अलग हवाला चैनलों से ट्रांसफर करवाई थी। इस तरह की फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है,क्योंकि इसमें पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यही कारण है कि अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि गोलू पंडित को कुल कितनी रकम दी गई थी।

मुंबई क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जाँच में यह साफ हो चुका है कि गोलू पंडित इस पूरे मामले की अहम कड़ी था। उसने न केवल शूटरों की पहचान की,बल्कि उन्हें आवश्यक लॉजिस्टिक सपोर्ट भी उपलब्ध कराया। यानी, हमले की पूरी योजना में उसकी भूमिका केवल भर्ती तक सीमित नहीं थी,बल्कि उसने हमले को अंजाम देने के लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था भी की।

जाँच में यह भी सामने आया है कि इस वारदात की योजना काफी पहले से बनाई जा रही थी। क्राइम ब्रांच को संदेह है कि गैंग ने इस हमले के लिए लंबे समय तक तैयारी की थी और हर संभावित स्थिति के लिए बैकअप प्लान भी तैयार रखा था। इससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था,बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया प्रयास था।

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण खुलासा यह हुआ है कि जब हरियाणा से शूटर और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई,तो लॉरेंस बिश्नोई को अंदेशा हो गया था कि पुलिस जल्द ही गोलू पंडित तक पहुँच सकती है। इसके बाद खुद लॉरेंस बिश्नोई ने आरजू बिश्रोई के माध्यम से गोलू पंडित से संपर्क किया और उसे सख्त निर्देश दिए कि वह पूछताछ के दौरान किसी भी तरह की जानकारी पुलिस को न दे।

इसी कारण से,क्राइम ब्रांच को गोलू पंडित से जानकारी हासिल करने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार,12 दिनों की कस्टडी के बावजूद वह ज्यादा कुछ नहीं बता पाया,जिससे जाँच की रफ्तार प्रभावित हुई। यह भी माना जा रहा है कि आरोपी को पहले से ही इस तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया था,ताकि वह पुलिस के दबाव में भी चुप रहे।

फिलहाल गोलू पंडित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। क्राइम ब्रांच ने कोर्ट से उसकी पुलिस रिमांड बढ़ाने की माँग की थी,लेकिन अदालत ने 11 दिन की पुलिस हिरासत के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया। अब एजेंसियाँ अन्य आरोपियों और वित्तीय लेनदेन के सुरागों के आधार पर जाँच को आगे बढ़ा रही हैं।

यह मामला केवल एक फायरिंग घटना तक सीमित नहीं है,बल्कि यह संगठित अपराध और उसके फंडिंग नेटवर्क की जटिलता को भी उजागर करता है। हवाला के जरिए पैसे भेजने की प्रणाली ने जाँच एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा कर दी है,क्योंकि इसमें लेनदेन का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं होता। इसके बावजूद,क्राइम ब्रांच इस नेटवर्क को तोड़ने और पूरे षड्यंत्र के मास्टरमाइंड तक पहुँचने की कोशिश में जुटी हुई है।

रोहित शेट्टी जैसे हाई-प्रोफाइल व्यक्ति को निशाना बनाए जाने से यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। इस घटना ने फिल्म इंडस्ट्री और आम जनता के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जाँच एजेंसियाँ इस मामले में कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से सभी आरोपियों तक पहुँच पाती हैं और क्या इस संगठित अपराध नेटवर्क को पूरी तरह से उजागर कर पाती हैं।

इस फायरिंग केस में सामने आए खुलासों ने यह साबित कर दिया है कि अपराध जगत में तकनीक और नेटवर्किंग का इस्तेमाल किस स्तर तक पहुँच चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है,जो न केवल इस केस बल्कि देश में सक्रिय अन्य आपराधिक नेटवर्क्स को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने ला सकते हैं।