दौसा,1 जुलाई (युआईटीवी)- राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार को एक भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियाँ छीन लीं। हरिद्वार से मध्य प्रदेश के इंदौर जा रही एक टूरिस्ट स्लीपर बस और एक ट्रक के बीच हुई जोरदार टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई। हादसा इतना भयावह था कि कुछ ही मिनटों में आग ने दोनों वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। इस दुर्घटना में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई,जबकि 22 से अधिक यात्री घायल हो गए। घायलों को तत्काल दौसा जिला अस्पताल पहुँचाया गया,जहाँ उनका इलाज जारी है। प्रशासन के अनुसार चार यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।
यह दर्दनाक हादसा दौसा जिले के कोलवा थाना क्षेत्र में स्थित दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी तेज थी कि बस और ट्रक दोनों में तुरंत आग लग गई। आग की ऊँची लपटें और धुएँ का गुबार दूर तक दिखाई दे रहा था। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बस में सवार यात्री अपनी जान बचाने के लिए किसी तरह बाहर निकलने का प्रयास करने लगे,जबकि आसपास से गुजर रहे लोगों ने भी राहत कार्य शुरू कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं। दौसा और बांदीकुई से दमकल की गाड़ियाँ भेजी गईं,जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर घायलों को बाहर निकाला और उन्हें एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुँचाया। राहत और बचाव अभियान के दौरान घटनास्थल का दृश्य बेहद हृदयविदारक था। आग की वजह से बस पूरी तरह जल चुकी थी और कई यात्रियों का सामान भी राख हो गया।
प्रशासन की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त बस हरिद्वार से इंदौर जा रही थी। यह हंस ट्रैवल्स की स्लीपर बस थी,जिसमें लगभग 37 तीर्थयात्री सवार थे। सभी यात्री धार्मिक यात्रा से लौट रहे थे। दुर्घटना के बाद अधिकांश यात्री किसी तरह बस से बाहर निकलने में सफल रहे,लेकिन कुछ लोग आग और क्षतिग्रस्त वाहन के कारण भीतर ही फँस गए। यही लोग इस भीषण हादसे का शिकार बने।
दौसा के पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने बताया कि दुर्घटना में कुल आठ लोगों की मौत हुई है। इनमें से छह यात्रियों की मौत आग में झुलसने से हुई,जबकि दो अन्य की जान सिर में गंभीर चोट लगने के कारण गई। उन्होंने बताया कि घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर है और उनका उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिस ट्रक से बस की टक्कर हुई,वह पूरी तरह खाली था। प्रारंभिक जाँच के अनुसार दोनों वाहन एक्सप्रेसवे के सीधे हिस्से पर चल रहे थे। आशंका जताई जा रही है कि किसी तीसरे वाहन द्वारा ओवरटेक करने की कोशिश के दौरान बस और ट्रक के बीच टक्कर हुई होगी। हालाँकि,दुर्घटना का वास्तविक कारण विस्तृत जाँच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश के सबसे आधुनिक और महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे में गिना जाता है। इसके बावजूद समय-समय पर यहाँ गंभीर सड़क दुर्घटनाएं सामने आती रही हैं। तेज रफ्तार,भारी वाहनों की आवाजाही और कई बार लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हादसों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। इस ताजा दुर्घटना ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियमों के प्रभावी पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे की जानकारी मिलते ही कांग्रेस सांसद मुरारीलाल मीणा भी घटनास्थल पर पहुँचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने अस्पताल पहुँचकर घायलों का हालचाल भी जाना। उन्होंने मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा को शांति मिले और उनके परिजनों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति प्राप्त हो।
मुरारीलाल मीणा ने कहा कि अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार आठ लोगों की मृत्यु हुई है और कई घायल यात्रियों का इलाज दौसा जिला अस्पताल में चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात का गंभीरता से अध्ययन कराना चाहिए कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बार-बार दुर्घटनाएँ क्यों हो रही हैं। उनके अनुसार यदि दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक और तकनीकी जाँच कराई जाए,तो भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार विशेषज्ञों की एक समिति गठित करे,जो एक्सप्रेसवे पर होने वाली दुर्घटनाओं का विस्तृत अध्ययन करे। यह समिति सड़क की डिजाइन,यातायात प्रबंधन,गति नियंत्रण,संकेतक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों की सिफारिश करे। उनका मानना है कि केवल दुर्घटना के बाद राहत कार्य करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी कदम उठाना भी आवश्यक है।
उधर जिला प्रशासन ने मृतकों की पहचान करने और उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आग की तीव्रता के कारण कुछ शव बुरी तरह झुलस गए,जिससे पहचान में कठिनाई आ रही है। प्रशासन आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंपेगा। वहीं घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों ने भी राहत एवं बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बस में फँसे यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया। उनकी तत्परता के कारण कई यात्रियों की जान बचाई जा सकी। पुलिस और दमकल विभाग के पहुँचने तक स्थानीय नागरिक लगातार राहत कार्य में जुटे रहे।
यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि आधुनिक और चौड़ी सड़कों पर भी यातायात नियमों का पालन,सुरक्षित गति और सतर्कता बेहद जरूरी है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे पर छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फिलहाल प्रशासन दुर्घटना के कारणों की जाँच कर रहा है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह भीषण टक्कर हुई। इस बीच पूरे देश में इस दुखद घटना को लेकर शोक की लहर है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त की जा रही हैं।
