ब्रुसेल्स,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस हफ्ते दो अलग-अलग अविश्वास प्रस्तावों का सामना कर रही हैं। तीन महीने पहले ही उन्हें अपने पहले निंदा प्रस्ताव से बचना पड़ा था,लेकिन अब राजनीतिक दबाव और आलोचनाओं की लकीरें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस बार उनके खिलाफ प्रस्ताव पैट्रियट्स फॉर यूरोप (पीएफई) और द लेफ्ट ने पेश किया है,जिनमें यूरोपीय आयोग की नीतियों,व्यापार समझौतों और उनकी शासन शैली पर सवाल उठाए गए हैं। यूरोपीय संसद में इन प्रस्तावों पर बहस सोमवार को शाम 5 बजे सीईएसटी समय पर होगी,जबकि मतदान गुरुवार को दोपहर 12 बजे अलग-अलग किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों प्रस्ताव वॉन डेर लेयेन के खिलाफ विफल होंगे,लेकिन यह राजनीतिक दृष्टि से उनके सत्ता में बने रहने और नेतृत्व शैली पर नए सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रस्तावों की समानता विशेष रूप से यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की आलोचना में नजर आती है। इस समझौते में अमेरिका में निर्मित ऊर्जा पर 750 अरब यूरो खर्च करने और अमेरिकी बाजार में 600 अरब यूरो निवेश करने की गैर-बाध्यकारी प्रतिबद्धता शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते की आलोचना यूरोप के व्यापारियों और किसानों के हितों को लेकर लगातार उठती रही है और इसे यूरोप के लिए अपमानजनक बताया गया है।
हाल ही में हुए सर्वेक्षणों में 52 प्रतिशत लोगों ने इस समझौते को यूरोप के हितों के खिलाफ और असंतुलित बताया। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्वीकार किया है कि यह समझौता अपूर्ण है,लेकिन उनका मानना है कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा शुरू किए गए व्यावसायिक उतार-चढ़ाव का मुकाबला करने में सक्षम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते के माध्यम से यूरोप को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है और यह लंबी अवधि में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
पीएफई और द लेफ्ट दोनों ने वॉन डेर लेयेन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने ईयू-मर्कोसुर मुक्त व्यापार समझौते के दौरान पारदर्शिता का अभाव रखा। यह समझौता अर्जेंटीना,ब्राजील,पैराग्वे और उरुग्वे के दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह के साथ पिछले साल दिसंबर में संपन्न हुआ था और अब स्वीकृति के लिए प्रक्रिया में है। आलोचक यह मानते हैं कि इस समझौते से यूरोपीय किसानों और छोटे व्यापारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हालाँकि,दोनों राजनीतिक दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी हैं। पीएफई आयोग की अनियमित प्रवासन नीतियों और हरित नीतियों में कथित भ्रामक दिशा से असंतुष्ट है। इसके विपरीत,द लेफ्ट जलवायु परिवर्तन,सामाजिक संकट और गाजा पर इजरायली हमलों की आलोचना पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मतभेद इस बात का संकेत हैं कि प्रस्तावों के पीछे केवल एक ही एजेंडा नहीं है,बल्कि विभिन्न मुद्दों और नीतियों को लेकर असंतोष का मिश्रित स्वरूप है।
वामपंथी प्रवक्ता थॉमस शैनन ने यूरो न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका लक्ष्य आयोग को गिराना नहीं है,बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यूरोपीय संसद की भूमिका स्पष्ट रहे और महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान दिया जाए। शैनन ने कहा, “अब समय समाप्त हो गया है और यह स्पष्ट हो चुका है कि यूरोपीय आयोग को अपनी नीतियों और कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा।”
वॉन डेर लेयेन के प्रवक्ता ने बताया कि अध्यक्ष सोमवार को पूर्ण बहस में भाग लेंगी और सांसदों के प्रश्नों के उत्तर देंगी। यूरोपीय संसद में तीन प्रमुख मध्यमार्गी दल — यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (ईपीपी),सोशलिस्ट एंड डेमोक्रेट्स (एसएंडडी) और रिन्यू यूरोप के उदारवादियों के समर्थन से उनके अविश्वास प्रस्ताव से बचने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि मध्यमार्गी दलों का समर्थन उनके लिए निर्णायक साबित होगा,लेकिन इस प्रक्रिया ने उनकी राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठाए हैं।
तीसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही वॉन डेर लेयेन के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। जुलाई में हुई पहली अविश्वास प्रस्ताव की बहस में 360 वोट उनके खिलाफ पड़े थे,जबकि 175 वोट उनके पक्ष में थे और 18 सांसदों ने मतदान में भाग नहीं लिया। उस दौरान वॉन डेर लेयेन ने आलोचकों की तीखी आलोचना की और उन्हें रूसी कठपुतली बताया। उन्होंने संसद के साथ अपने संबंधों को सुधारने और मध्यमार्गी गठबंधन में मतभेदों को सुलझाने का प्रयास किया।
इस बार प्रस्तुत प्रस्ताव वॉन डेर लेयेन के शासन और उनकी नीतियों के प्रति यूरोपीय संसद में लगातार बढ़ते असंतोष का संकेत हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह यूरोपीय आयोग के लिए चुनौतीपूर्ण समय है,क्योंकि उन्हें न केवल घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीतियों में संतुलन बनाए रखना है,बल्कि विभिन्न दलों के विरोध का सामना भी करना है।
यूरोपीय संसद में बहस और मतदान के परिणाम से यह स्पष्ट होगा कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन अपनी अध्यक्षता में कितनी स्थिरता बनाए रख सकती हैं और उनकी नीति-निर्माण क्षमता पर कितना भरोसा किया जाता है। उनके नेतृत्व में यूरोपीय संघ कई आर्थिक,पर्यावरणीय और अंतर्राष्ट्रीय संकटों का सामना कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन प्रस्तावों की प्रक्रिया यूरोपीय संघ के लोकतांत्रिक तंत्र और नीति-निर्माण की पारदर्शिता के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षण साबित होगी।
इस बीच,उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी नीतियों और समझौतों की रक्षा करेंगी,लेकिन आलोचनाओं को भी गंभीरता से लेंगी। इस सप्ताह होने वाले बहस और मतदान से उनके दूसरे कार्यकाल की दिशा और उनके नेतृत्व की वैधता स्पष्ट होगी। यूरोपीय आयोग के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है,क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार,जलवायु नीति और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर उनकी नीतियों का परीक्षण हो रहा है और संसद में बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण ने इस प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।
वॉन डेर लेयेन का राजनीतिक कौशल और गठबंधन बनाने की क्षमता इस परीक्षण में निर्णायक साबित होगी। उनके नेतृत्व की स्थिरता,यूरोपीय संसद के सहयोग और जनता की नीतियों पर विश्वास इस अवधि में उनके कार्यकाल की सफलता का मापदंड बनेगा।
